आजमगढ़ हत्याकांड के बाद अनाथ हुईं दोनों बच्चियों की जिम्मेदारी पुलिस ने उठाई, SSP ने दिया एक माह का वेतन

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में अहरौला थाना क्षेत्र के शम्भूपुर हत्याकांड के बाद माता-पिता का साया खो चुकीं दोनों मासूम बच्चियों के लिए आजमगढ़ पुलिस परिवार ने बड़ी पहल की है। पुलिस ने दोनों बच्चियों के पालन-पोषण, शिक्षा-दीक्षा और भविष्य के लिए सहयोग करने का निर्णय लिया है। एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने अपना एक माह का वेतन देते हुए बच्चियों को गोद लिया है, जबकि जनपद के सभी पुलिसकर्मियों ने एक-एक दिन का वेतन बच्चियों को देने का फैसला किया है।

तीन बच्चों के साथ कमरे में बंद हो गया था अरविंद

शम्भूपुर हत्याकांड के दौरान पत्नी और पूजा कराने आए ब्राह्मण पर हमला करने के बाद अरविंद अपने तीन बच्चों और लाइसेंसी रिवाल्वर के साथ कमरे में बंद हो गया था। पुलिस और परिजन करीब सात घंटे तक उसे समझाने का प्रयास करते रहे और बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने की अपील करते रहे, लेकिन वह नहीं माना। इस दौरान अरविंद बच्चों को जान से मारने की धमकी भी देता रहा।

जान जोखिम में डालकर पुलिस ने बच्चियों को बचाया

देर रात कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। बच्चों की जान पर तत्काल खतरा देखते हुए एसएसपी डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप ने जान जोखिम में डालकर दरवाजा तोड़ा और कमरे में प्रवेश किया।

पुलिस के अनुसार, कमरे के अंदर नौ वर्षीय शौर्य गोली लगने से गंभीर रूप से घायल मिला। पुलिस उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंची, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं पुलिस टीम ने 11 वर्षीय परी और छह माह की बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

शौर्य की मौत को लेकर बहन ने लगाए आरोप

घटना के दूसरे दिन अरविंद की बहन ने आरोप लगाया कि उसके भतीजे शौर्य की मौत पुलिस की गोली से हुई। इसके बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि शौर्य को पुलिस की गोली नहीं लगी थी।

पुलिस के मुताबिक पोस्टमार्टम में गोली के प्रवेश वाले स्थान पर ब्लैकनिंग, टैटूइंग और स्कॉर्चिंग के निशान मिले हैं, जो बेहद नजदीक से गोली चलने की ओर संकेत करते हैं। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल पर पुलिस टीम और बच्चों के बीच करीब 8 से 10 फीट की दूरी थी और आरोपी को निष्क्रिय किए जाने से पहले पुलिस का बच्चों के इतने करीब पहुंचना संभव नहीं था।

पुलिस की ओर से कहा गया कि अरविंद द्वारा बेटे को गोली मारने और पुलिस पर फायरिंग करने के बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल हुआ और इलाज के लिए ले जाते समय उसकी मौत हो गई।

एडीजी और डीआईजी भी मौके पर रहे मौजूद

पूरे अभियान के दौरान एडीजी वाराणसी जोन नवीन अरोड़ा और डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र सुनील कुमार सिंह मौके पर मौजूद रहे और पुलिस टीम को दिशा-निर्देश देते रहे। पुलिस के मुताबिक रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान परी की कोहनी के पास मामूली खरोंच आई।

अब दोनों बच्चियों के भविष्य में सहयोग करेगा पुलिस परिवार

शम्भूपुर हत्याकांड के बाद दोनों बच्चियां माता-पिता के साये से महरूम हो गई हैं। ऐसे में आजमगढ़ पुलिस परिवार ने उनके भविष्य और पालन-पोषण में सहयोग करने का निर्णय लिया है।

एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने अपना एक माह का वेतन देने के साथ दोनों बच्चियों को गोद लिया है। वहीं, जनपद के सभी पुलिसकर्मियों ने भी एक-एक दिन का वेतन दोनों बच्चियों को देने का फैसला किया है। पुलिस परिवार की यह पहल बच्चियों की शिक्षा, पालन-पोषण और भविष्य के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में की गई है।

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