उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक बातें लिखकर ईमेल भेजने के मामले में आरोपी मुबारक अली को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उनकी सशर्त जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। आरोपी काफी समय से जेल में बंद था। कोर्ट के इस आदेश के बाद उसके जेल से बाहर आने का रास्ता खुल गया है, हालांकि उसे अदालत की ओर से निर्धारित सभी जमानत शर्तों का पालन करना होगा।
यह मामला महराजगंज जिले के भितौली थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। आरोपी के खिलाफ वर्ष 2024 में एफआईआर दर्ज की गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुबारक अली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित आपत्तिजनक बातें लिखते हुए एक ईमेल भेजा था।
मामले को सुलझाने के लिए ईमेल भेजने का आरोप
पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, यह ईमेल पुलिस की मुखबिर जन्नतुलनिसा से जुड़े एक मामले को सुलझाने के प्रयास के दौरान भेजा गया था। आरोप है कि मुबारक अली ने इस मामले के निपटारे की कोशिश में मुख्यमंत्री के संबंध में कथित आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था।
शिकायत और पुलिस जांच के आधार पर मुबारक अली के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई थी। इसके बाद आरोपी की ओर से अदालत में जमानत के लिए याचिका दाखिल की गई और अपने पक्ष में दलीलें पेश की गईं।
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने दिया आदेश
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी पक्ष और अभियोजन की ओर से रखी गई दलीलों पर विचार किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुबारक अली को सशर्त जमानत देने का आदेश पारित किया।
मुबारक अली की जमानत याचिका पर सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्ण पहल की सिंगल बेंच ने की। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने जमानत मंजूर करने का फैसला सुनाया। कोर्ट के आदेश के बाद आरोपी को जमानत की निर्धारित शर्तों का पालन करते हुए जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो सकता है।
यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित आपत्तिजनक ईमेल भेजे जाने से जुड़ा है और हाईकोर्ट के जमानत आदेश के बाद आरोपी को न्यायिक राहत मिली है। जमानत मिलना मामले में आरोपों से बरी होना नहीं है; मुकदमे की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है।