PM Modi Teachers Meeting: शिक्षक दिवस पर पीएम मोदी ने शिक्षकों से की खास बातचीत, Public Speaking से लेकर Screen Time तक दिए बड़े संदेश

शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 5 सितंबर को नेशनल अवॉर्ड हासिल करने वाले कुछ शिक्षकों से खास मुलाकात की। इस मौके पर प्रधानमंत्री आवास पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को आमंत्रित किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों के साथ शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की और उनसे सुझाव भी मांगे। इस मुलाकात का एक वीडियो प्रधानमंत्री मोदी के सोशल मीडिया हैंडल पर भी साझा किया गया है।

एक नेशनल अवॉर्ड विजेता शिक्षक से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र काशी में ब्रेस्ट कैंसर को लेकर चलाए गए जागरूकता अभियान का अनुभव साझा किया। पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं काशी का सांसद हूं और मैंने वहां ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता अभियान शुरू किया था, और मुझे यह देखकर खुशी होती है कि अब महिलाएं सामने से आकर जांच करवा रही हैं. पहले ऐसी स्थिति नहीं थी. एक और अच्छा अनुभव एक ही दिन में सबसे ज़्यादा लोगों की स्क्रीनिंग का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना रहा.’

Public Speaking Skills को लेकर पीएम मोदी ने शिक्षिका से मांगी सलाह

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स को और बेहतर बनाने को लेकर भी शिक्षिका से सुझाव मांगा। उन्होंने खुद को एक विद्यार्थी की स्थिति में रखते हुए पूछा, “अगर मैं आपके यहां विद्यार्थी होता और एक कुशल वक्ता बनना चाहता, तो आप मुझे क्या सुझाव देतीं? मुझे क्या करना चाहिए?”

इस सवाल के जवाब में शिक्षिका ने आत्मविश्वास और अभ्यास को प्रभावी वक्ता बनने के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “सबसे पहले, आपमें आत्मविश्वास होना चाहिए… आत्मविश्वास बहुत ज़्यादा अभ्यास से आता है. आपका व्यक्तित्व देखकर मैं खुद भी थोड़ी घबरा गई थी…”

Screen Time और बच्चों के बचपन पर पीएम मोदी ने जताई चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर भी अपनी चिंता साझा की। उन्होंने कहा, ‘स्क्रीन टाइम अब एक प्रकार की लत बन गया है. मेरे मन में एक विचार आता है: या तो वो बच्चा खेलों में गहरी रूचि लेने लगे – और खेलों से मेरा मतलब वीडियो गेम नहीं, बल्कि मैदान पर असल खेलों से है – तो हो सकता है कि वह धीरे-धीरे इस लत से बाहर निकल आए. इस संदर्भ में, हम बच्चों को जितना ज़्यादा रचनात्मक कामों में लगाएंगे, हमें ऐसे प्रोग्राम बनाने की आदत डालनी चाहिए जो इसे बढ़ावा दें.’

पीएम मोदी ने शिक्षा व्यवस्था में बच्चों के समग्र विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल किताबों और सिलेबस तक सीमित रखने के बजाय बच्चों के जीवन और उनकी रचनात्मकता से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा, ‘मैं आप सभी से बात कर रहा हूँ, लेकिन मैं पूरे शिक्षा जगत से ये कहना चाहता हूं कि हमें पहले से ज्यादा किताबों और सिलेबस से बाहर निकलकर बच्चों की जिंदगी में घुसना होगा. बचपन मरने नहीं देना चाहिए. बचपन बनाए रखने का सबसे बड़ा काम शिक्षक कर सकता है. शिक्षक का काम है कि उसके अंदर बचपन बना रहे.’

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