दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) में इलाज करा रही राजस्थान के कोटा की 16 वर्षीय तन्वी की मौत के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तन्वी ने मंगलवार, 1 सितंबर 2026 की सुबह दम तोड़ दिया। परिवार का आरोप है कि वह लंबे समय से दिल की सर्जरी के लिए AIIMS के चक्कर लगा रहा था, लेकिन ऑपरेशन नहीं हो सका। मामले ने तूल पकड़ा तो AIIMS प्रशासन ने उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर घटना की जांच शुरू कर दी है।
13 साल से AIIMS में इलाज, आखिर क्यों नहीं हो सकी सर्जरी?
तन्वी को जन्म से ही दिल की गंभीर जन्मजात बीमारी थी। उसके मामले में वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) यानी दिल में छेद के साथ पल्मोनरी एट्रेसिया की भी जानकारी सामने आई थी। परिवार के अनुसार, 2012 से वह AIIMS में इलाज और सर्जरी की उम्मीद लेकर आता-जाता रहा, लेकिन अलग-अलग परिस्थितियों के चलते सर्जरी आगे नहीं बढ़ सकी।
परिजनों ने इस मामले को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तक शिकायत की थी। तन्वी के पिता मुकेश कुमार ने अपनी बेटी की मौत के बाद डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई और न्याय की मांग की है।
उन्होंने कहा, “मैं पिछले 14 साल से दिल्ली में भाग-दौड़ कर रहा हूं. मुझे न्याय चाहिए और डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. मुझे सिर्फ़ बहाने या औपचारिकताएं नहीं चाहिए. मैं राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से खास गुजारिश करता हूं कि तीन बार शिकायत करने के बावजूद मेरी बेटी को बचाया नहीं जा सका.”
AIIMS ने जारी की तन्वी के इलाज की पूरी जानकारी
मामले पर AIIMS की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, तन्वी पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को AIIMS के कार्डियोलॉजी OPD में जांच के लिए आई थी। मेडिकल जांच में उसे VSD और पल्मोनरी एट्रेसिया की समस्या का पता चला। पल्मोनरी एट्रेसिया एक जन्मजात हृदय संबंधी बीमारी है, जिसमें हृदय से फेफड़ों तक रक्त पहुंचने के रास्ते में गंभीर समस्या होती है।
AIIMS के अनुसार, वर्ष 2013 में तन्वी के हृदय की बनावट और सर्जरी की संभावनाओं का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। इसके लिए CT एंजियोग्राफी, कन्वेंशनल एंजियोग्राफी और कार्डियक कैथीटेराइजेशन जैसी जांच की गईं। इन जांचों के जरिए डॉक्टरों ने बीमारी की जटिलता और ऑपरेशन की संभावनाओं को समझने का प्रयास किया।
2017 में क्यों सर्जरी को बताया गया मुश्किल?
AIIMS के मुताबिक, विस्तृत मूल्यांकन के बाद वर्ष 2017 में तन्वी के हृदय की संरचना और बीमारी की जटिलता को देखते हुए यह निष्कर्ष निकाला गया कि उसकी सर्जरी संभव नहीं थी। इसके बाद परिवार को नियमित मेडिकल जांच और दवाओं के जरिए उपचार जारी रखने की सलाह दी गई।
AIIMS का कहना है कि इसके बाद भी तन्वी अस्पताल के संपर्क में रही और नियमित चेकअप कराती रही। इसी साल 24 अगस्त को उसे हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना का मूल्यांकन करने के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था।
परिवार ने सर्जरी की संभावना को लेकर दूसरी चिकित्सकीय राय भी लेने की कोशिश की। पिछले साल परिजनों ने कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग के प्रमुख से सलाह ली थी। वहां भी दवाओं के जरिए उपचार जारी रखने की सलाह दी गई। इसके बाद परिवार ने एक अन्य वरिष्ठ कार्डियोथोरेसिक सर्जन से राय ली, जिन्होंने भी दवा से इलाज जारी रखने की सलाह दी थी।
अगस्त 2026 में फिर AIIMS में भर्ती हुई तन्वी
AIIMS के अनुसार, अगस्त 2026 में तन्वी की हालत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल लाया गया। 24 अगस्त 2026 को उसे भर्ती कर उसकी विस्तृत चिकित्सकीय जांच की गई। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए हार्ट-लंग ट्रांसप्लांटेशन की संभावनाओं का भी मूल्यांकन किया गया।
हालांकि, इलाज के दौरान 1 सितंबर 2026 को तन्वी की मौत हो गई। उसकी मौत के बाद परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों और इलाज से जुड़े सवालों को देखते हुए AIIMS प्रशासन ने मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है।
AIIMS ने अपने आधिकारिक बयान में मरीजों की सुरक्षा, पारदर्शिता, सबूतों पर आधारित क्लिनिकल फैसलों और जवाबदेही के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। संस्थान ने कहा है कि पोस्टमार्टम और जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।