बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला एक बार फिर सियासी विवाद के केंद्र में आ गया है। भरत तिवारी के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और आर्थिक सहायता का ऐलान किए जाने के बाद कांग्रेस और आरजेडी ने सम्राट चौधरी सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष ने पूछा है कि आखिर भरत तिवारी की मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन था और क्या जांच की आंच पुलिस या अन्य अधिकारियों तक पहुंचेगी?
गुरुवार (13 अगस्त 2026) को बिहार सरकार की ओर से भरत तिवारी के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की गई। सरकार ने परिवार को आर्थिक मदद देने की बात भी कही है। इस फैसले के बाद विपक्ष ने सरकार की मंशा और अब तक हुई जांच को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस ने पूछा- भरत तिवारी को किसके आदेश पर मारी गई गोली?
कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा कि भरत तिवारी के परिवार को मुआवजा और सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए, लेकिन इसके साथ परिवार को न्याय भी मिलना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न्याय देने के बजाय मामले की लीपापोती करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “इतनी लंबी जांच के बाद सरकार ये नहीं बता पाई कि किसके आदेश पर भरत तिवारी को गोली मारी गई? भरत तिवारी की हत्या किस अधिकारी ने करवाई? अभी तक सरकार ये नहीं बता पाई कि किसके आदेश पर एसटीएफ पहुंची. सरकार लीपापोती में है. हम लोग लीपापोती नहीं होने देंगे.”
असित नाथ तिवारी के इन आरोपों के बाद विपक्ष ने सरकार से जांच की दिशा और उसकी प्रगति को लेकर जवाब मांगा है। कांग्रेस का कहना है कि परिवार को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ घटना की पूरी सच्चाई भी सामने आनी चाहिए।
RJD ने पूछा- ‘अधिकारियों तक पहुंचेगी जांच की आंच?’
आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर भरत तिवारी के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गई है और इसे उन्होंने दबाव की कार्रवाई बताया।
शक्ति यादव ने बिहार में पहले हुए अन्य कथित फेक एनकाउंटर का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या मौजूदा मामले में जांच की आंच उन अधिकारियों तक पहुंचेगी, जिनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं? साथ ही उन्होंने पूछा कि क्या संबंधित अधिकारियों के खिलाफ धारा 302 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा?
‘सरकार ने मान लिया फेक एनकाउंटर’
आरजेडी नेता शक्ति यादव ने सरकारी नौकरी के ऐलान को ही अपने आरोपों का आधार बनाते हुए सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “आखिर सम्राट चौधरी को झुकना पड़ा. सरकार को झुकना पड़ा. सरकार ने मान लिया कि ये फेक एनकाउंटर है तो बिहार की जनता से और देश की जनता से सम्राट चौधरी माफी मांगेंगे? कार्रवाई करेंगे उन पर जिनके आदेश पर गोली चली? जब सरकारी नौकरी का ऐलान किया तो मान लिया न कि फेक एनकाउंटर है. आखिरकार सच साबित हुआ. सरकार को झुकना पड़ा.”
आरजेडी नेता के इस बयान के बाद भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। हालांकि, सरकारी नौकरी दिए जाने के फैसले को लेकर बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए इसे कानून के राज और न्याय की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।
BJP ने कहा- ‘न किसी को फंसाते हैं, न बचाते हैं’
बिहार बीजेपी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने सम्राट चौधरी सरकार के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने घटना के तुरंत बाद न्यायिक जांच के आदेश दिए थे और यह जांच अभी जारी है।
नीरज कुमार ने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाए जा रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने सरकार की नीति स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार न तो किसी निर्दोष को फंसाना चाहती है और न ही किसी दोषी को बचाएगी।
बीजेपी प्रवक्ता के मुताबिक सरकार का उद्देश्य मामले की सच्चाई सामने लाना है। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी के परिवार को सरकारी नौकरी देने का फैसला इस बात को दर्शाता है कि बिहार में कानून का राज कायम है।
फिलहाल भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच जारी है। विपक्ष जहां सरकारी नौकरी और आर्थिक मदद के ऐलान को कथित फेक एनकाउंटर की स्वीकारोक्ति के तौर पर देख रहा है, वहीं बीजेपी इसे सरकार की संवेदनशीलता और कानून के राज को मजबूत करने वाला फैसला बता रही है। अब जांच की अंतिम रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में किसकी भूमिका थी और जिम्मेदारी किस पर तय होती है।