उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में निर्माणाधीन इथेनॉल फैक्ट्री को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। फैक्ट्री के विरोध में जहां ग्रामीण और समाजवादी पार्टी के नेता पहले से मुखर हैं, वहीं अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय नेताओं के बीच भी इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। एक ओर बीजेपी विधायक अजय सिंह ने फैक्ट्री का समर्थन किया, तो दूसरी ओर जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुमार चौधरी ने इसके संभावित दुष्प्रभावों का हवाला देते हुए इसका विरोध किया।
इथेनॉल प्लांट को लेकर बस्ती में तेज हुआ विरोध
बस्ती जिले के भानपुर तहसील अंतर्गत ग्राम दसिया (थाना रुधौली) में अनीता डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इथेनॉल प्लांट का निर्माण कराया जा रहा है। इस परियोजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है और कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए निर्माण कार्य तत्काल रोकने की मांग की है।
दूसरी ओर कंपनी प्रबंधन ने प्रेस वार्ता कर दावा किया कि यह परियोजना पर्यावरण के अनुकूल है और इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
बीजेपी विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष के बीच मतभेद
फैक्ट्री को लेकर आयोजित बैठक में बीजेपी विधायक अजय सिंह ने परियोजना का समर्थन किया। वहीं, उसी बैठक में बीजेपी के जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुमार चौधरी ने फैक्ट्री से संभावित पर्यावरणीय नुकसान का मुद्दा उठाते हुए इसे बंद करने की जरूरत बताई। उनके इस रुख का समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी समर्थन किया।
इस घटनाक्रम के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और अधिक चर्चा में आ गया है।
कंपनी का दावा- सभी नियमों का किया जा रहा पालन
कंपनी प्रबंधन का कहना है कि इथेनॉल प्लांट पूरी तरह पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। उनका दावा है कि परियोजना में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सभी नियमों का पालन किया जा रहा है और आवश्यक मंजूरियां (NOC) भी प्राप्त हैं।
कंपनी का यह भी कहना है कि कुछ लोग बिना पूरी जानकारी के इस परियोजना को लेकर भ्रम फैला रहे हैं और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।
अक्टूबर 2026 तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य
कंपनी के निदेशक रोहन जायसवाल के अनुसार, प्लांट का करीब 75 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2026 तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि प्लांट में ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसके तहत अशोधित पानी को बाहर नहीं छोड़ा जाएगा।
ग्रामीणों ने पर्यावरण और पानी को लेकर जताई चिंता
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी के दावों के बावजूद इस परियोजना से क्षेत्र के पर्यावरण और भूजल पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि प्लांट से करीब 200 मीटर की दूरी पर सरकारी स्कूल स्थित हैं, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा हो सकता है। साथ ही आसपास के 15 गांवों के किसानों को भी पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रामीणों की शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
सपा नेताओं ने भी किया विरोध
बस्ती से समाजवादी पार्टी के सांसद राम प्रसाद चौधरी ने कहा कि विकास के नाम पर जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण से समझौता नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि यदि 15 गांवों के किसान, स्थानीय लोग और स्कूली बच्चे इस परियोजना से प्रभावित हो रहे हैं तो उनकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
वहीं, सपा विधायक कविंद्र चौधरी ने आरोप लगाया कि इस मामले में स्थानीय लोगों की आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि स्कूल और घनी आबादी के पास प्लांट का निर्माण चिंता का विषय है और उनकी पार्टी ग्रामीणों के साथ खड़ी रहेगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने निष्पक्ष जांच की मांग की
बीजेपी के जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुमार चौधरी ने कहा कि यदि जांच में प्रदूषण नियंत्रण मानकों की अनदेखी या किसानों और ग्रामीणों के हितों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आती है तो इस मामले में सख्त रुख अपनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन जनता की सांसों और पानी की कीमत पर नहीं। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तर पर भी बात की जाएगी।