Indian Army IBG: चीन बॉर्डर पर तैनात हुई भारतीय सेना की सबसे घातक यूनिट, 7 साल बाद पूरा हुआ जनरल बिपिन रावत का सपना

भारतीय सेना ने अपनी युद्ध क्षमता को और अधिक मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) को ऑपरेशनल तैनाती दे दी है। यह यूनिट भारतीय सेना की सबसे नई माउंटेन स्ट्राइक कोर, जिसे ‘ब्रह्मास्त्र’ के नाम से भी जाना जाता है, के तहत गठित की गई है। माना जा रहा है कि यह वही सैन्य अवधारणा है, जिसकी शुरुआत तत्कालीन थलसेना प्रमुख और देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने की थी।

डोकलाम विवाद के बाद बनी थी IBG की रणनीति

साल 2017 में सिक्किम से सटे डोकलाम क्षेत्र में भारत और चीन के बीच 72 दिनों तक सैन्य गतिरोध चला था। उस दौरान चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की घुसपैठ की कोशिशों का भारतीय सेना ने डटकर मुकाबला किया था। इसी घटना के बाद तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने के लिए नई रणनीति तैयार की और वर्ष 2019 में इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) की अवधारणा पर काम शुरू हुआ।

क्या है Integrated Battle Group (IBG)?

इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप सेना की एक ऐसी फॉर्मेशन है, जो आकार में पारंपरिक ब्रिगेड से थोड़ी बड़ी होती है। इसमें इन्फैंट्री के साथ टैंक, आर्टिलरी, आर्मी एविएशन के अटैक हेलीकॉप्टर और एयर डिफेंस जैसी सभी जरूरी सैन्य क्षमताओं को एक साथ शामिल किया जाता है।

इसका उद्देश्य युद्ध जैसी स्थिति में लंबी तैयारी के बजाय बेहद कम समय में सीमावर्ती इलाकों में प्रभावी सैन्य कार्रवाई करना है। सामान्य परिस्थितियों में स्ट्राइक कोर सीमा से दूर तैनात रहती हैं, जिससे युद्ध के दौरान उन्हें मोर्चे तक पहुंचाने में समय लगता है। IBG इसी चुनौती का समाधान मानी जा रही है।

कहां तैनात की गई है भारतीय सेना की IBG?

भारतीय सेना ने इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप को माउंटेन स्ट्राइक कोर के तहत तैनात किया है, जिसका मुख्यालय पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में स्थित है। इसका एरिया ऑफ रिस्पॉन्सिबिलिटी (AOR) उत्तर-पूर्व से लगी पूरी चीन सीमा है।

सेना ने शुरुआती चरण में पांच IBG तैयार की हैं। हालांकि सुरक्षा कारणों से उनकी सटीक तैनाती की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इतना जरूर बताया गया है कि सभी यूनिट्स माउंटेन स्ट्राइक कोर के ऑपरेशनल क्षेत्र में तैनात हैं।

IBG को तैयार होने में क्यों लगे सात साल?

इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप की योजना पर काम 2019 में शुरू हुआ था, लेकिन इसे अमलीजामा पहनाने में करीब सात साल लग गए। इसकी वजह सेना के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव के लिए सरकारी मंजूरी, अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति और वित्तीय स्वीकृतियों की आवश्यकता बताई गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती दौर में प्रशासनिक स्तर पर इस योजना में देरी हुई। बाद में तत्कालीन थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जताई, जिसके बाद सरकार ने सेना के री-स्ट्रक्चरिंग प्रस्ताव को मंजूरी दी। अब इस योजना को चीन सीमा पर ट्रायल के तौर पर लागू किया गया है। माना जा रहा है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में पाकिस्तान सीमा पर भी इसी तरह की IBG तैनात की जा सकती हैं।

जनरल बिपिन रावत की रणनीति को मिला नया रूप

जनरल बिपिन रावत ने 2016 से 2019 के बीच थलसेना प्रमुख रहते हुए भारतीय सेना की सीमावर्ती रणनीति में कई अहम बदलाव किए थे। इसी दौरान चीन की ‘सलामी स्लाइसिंग’ रणनीति पर प्रभावी रोक लगाने में भारतीय सेना सफल रही।

वर्ष 2020 में, जब जनरल रावत देश के पहले CDS थे, तब गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुई झड़प के दौरान भारतीय सेना ने प्रभावी जवाबी कार्रवाई की थी। इसके बाद से 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी सेना की घुसपैठ की कोशिशों में कमी देखी गई।

दिसंबर 2021 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जनरल बिपिन रावत का निधन हो गया था। हालांकि उनकी मृत्यु के बाद भी भारतीय सेना ने IBG परियोजना को जारी रखा। हाल ही में सेवानिवृत्त हुए थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के कार्यकाल में इस महत्वाकांक्षी योजना को मूर्त रूप दिया गया और अब इसे चीन सीमा पर ऑपरेशनल तैनाती मिल चुकी है।

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