प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में नालंदा यूनिवर्सिटी में प्राचीन भारतीय ‘शास्त्रार्थ’ परंपरा को दोबारा शुरू किए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक शिक्षा और नई तकनीक के साथ जोड़ने का उत्कृष्ट उदाहरण है।
‘शास्त्रार्थ’ को फिर से जीवंत करने पर नालंदा यूनिवर्सिटी की सराहना
‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दो वर्ष पहले नालंदा यूनिवर्सिटी के नए परिसर के उद्घाटन की याद साझा की। उन्होंने कहा, “दो साल पहले मुझे नालंदा यूनिवर्सिटी के कैंपस का उद्घाटन करने का मौका मिला था. नालंदा यूनिवर्सिटी ने हमारी ‘शास्त्रार्थ’ की प्राचीन परंपरा को फिर से जीवित किया है. शास्त्रार्थ सिर्फ अपनी बात रखने का जरिया नहीं है बल्कि ये बहस बातचीत और मंथन की एक अनुशासित प्रक्रिया है.”
तर्क, संवाद और विचारों के सम्मान की सीख देता है शास्त्रार्थ
प्रधानमंत्री ने कहा कि शास्त्रार्थ केवल अपने विचार रखने का माध्यम नहीं, बल्कि यह तथ्यों और तर्कों के आधार पर संवाद करने की एक प्राचीन भारतीय परंपरा है। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया प्रतिभागियों को अपने पक्ष को प्रमाणों के साथ प्रस्तुत करना सिखाती है और साथ ही दूसरों के विचारों को धैर्यपूर्वक सुनने एवं समझने की प्रेरणा भी देती है।
पीएम मोदी ने इस बात पर भी प्रसन्नता जताई कि नालंदा यूनिवर्सिटी ने अपने दीक्षांत समारोह में ‘शास्त्रार्थ’ को शामिल किया। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले लगभग आधे छात्र विभिन्न देशों से आए थे।
देश के अन्य शिक्षण संस्थानों से भी की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अभिनव पहल के लिए नालंदा यूनिवर्सिटी को बधाई दी और देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों से भी ऐसी परंपराओं को अपनाने पर विचार करने का आग्रह किया। उनका मानना है कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय छात्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
AI के दौर में रचनात्मकता बचाए रखना सबसे बड़ी चुनौती
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीकों के तेजी से बढ़ते प्रभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “दोस्तों यह टेक्नोलॉजी का दौर है. हर दिन नई रिसर्च हो रही है. AI से जुड़े नए इनोवेशन सामने आ रहे हैं. इस दौर में एक सवाल बहुत अहम है कि लोगों की रचनात्मकता को कैसे बचाए रखा जाए? नई टेक्नोलॉजी के साथ आगे बढ़ते हुए हम अपनी जड़ों से कैसे जुड़े रहें?”
उन्होंने कहा कि नई तकनीकों को अपनाना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और रचनात्मक सोच को भी संरक्षित रखना उतना ही महत्वपूर्ण है।