PM मोदी को ईरान जाना चाहिए? ओवैसी की बड़ी मांग, विदेश नीति और इज़राइल पर भी साधा निशाना

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ईरान के सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने की अपील करते हुए भारत की विदेश नीति पर कई सवाल उठाए हैं. हैदराबाद में शुक्रवार को दिए गए बयान में ओवैसी ने कहा कि यदि तेहरान की ओर से औपचारिक राजनयिक निमंत्रण प्राप्त होता है, तो प्रधानमंत्री को किसी प्रतिनिधिमंडल को भेजने के बजाय स्वयं अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहिए.

ओवैसी का कहना है कि भारत को इस मौके पर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि देश को इज़राइल और अमेरिका के भू-राजनीतिक दबाव के आगे झुकने से बचना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी अलग पहचान को मजबूती से प्रस्तुत करना चाहिए.

भारत-ईरान संबंधों का दिया हवाला

भारत और ईरान के लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों का उल्लेख करते हुए ओवैसी ने कहा कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत उपस्थिति दोनों देशों के रिश्तों की गंभीरता को दर्शाएगी. उन्होंने तर्क दिया कि भारत को यह संदेश देना चाहिए कि वह वैश्विक राजनीति में स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम है और किसी भी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होता.

ओवैसी ने कहा कि केवल एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजना राजनयिक दृष्टि से पर्याप्त नहीं माना जाएगा. उनके अनुसार, ईरान ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का समर्थन किया है और ऐसे में उसे उचित सम्मान देना जरूरी है.

विदेश नीति को लेकर सरकार पर हमला

मौजूदा केंद्र सरकार की विदेश नीति की आलोचना करते हुए ओवैसी ने प्रधानमंत्री मोदी की इज़राइल यात्रा को एक बड़ी रणनीतिक भूल बताया. उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय तनाव और संघर्ष के माहौल में इज़राइली नेतृत्व के साथ सार्वजनिक रूप से खड़े होने से भारत की पारंपरिक संतुलित विदेश नीति को नुकसान पहुंचा है.

उनका आरोप है कि इस कदम से मध्य पूर्व क्षेत्र में भारत की निष्पक्ष छवि प्रभावित हुई है और लंबे समय से बनाए गए कूटनीतिक संतुलन पर असर पड़ा है.

इज़राइल को लेकर भी जताई आपत्ति

क्षेत्र में जारी संघर्ष का उल्लेख करते हुए ओवैसी ने इज़राइल की नीतियों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का आकलन करते समय मानवीय पहलुओं को भी ध्यान में रखना चाहिए. उनके अनुसार, विदेश नीति के फैसलों में केवल रणनीतिक हित ही नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारियां भी महत्वपूर्ण होती हैं.

भारत को दी कूटनीतिक संदेश की सलाह

ओवैसी ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री स्वयं ईरान के निमंत्रण का सम्मान करते हैं, तो इससे दुनिया को एक स्पष्ट संदेश जाएगा कि भारत की विदेश नीति उसके राष्ट्रीय हितों, नैतिक मूल्यों और ऐतिहासिक संबंधों पर आधारित है.

उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि भारत इस अवसर पर सक्रिय भूमिका नहीं निभाता या निमंत्रण को नजरअंदाज करता है, तो ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के बीच उसकी स्थिति प्रभावित हो सकती है. ओवैसी के अनुसार, वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए कई बार कठिन लेकिन महत्वपूर्ण फैसले लेने पड़ते हैं.

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