आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने के बाद पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। गोवा की राजधानी पणजी में मीडिया से बातचीत के दौरान जब उनसे इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा कि यह “दुर्भाग्यपूर्ण” था।
गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में आम आदमी पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से सात सांसदों के भाजपा में शामिल होने की खबर सामने आई थी, जिनमें राघव चड्ढा का नाम भी शामिल बताया गया था।
बीजेपी पर साधा निशाना
राघव चड्ढा के मुद्दे के अलावा अरविंद केजरीवाल ने पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस (TMC) में कथित टूट को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं दर्शाती हैं कि भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए दूसरे दलों को कमजोर करने का प्रयास करती है।
केजरीवाल ने दावा किया कि जनता किसी एक पार्टी को वोट देती है, लेकिन बाद में विधायकों और सांसदों के दल बदलने से मतदाताओं के जनादेश का सम्मान नहीं हो पाता।
‘लोकतंत्र के लिए घातक है यह प्रवृत्ति’
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में जो राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिले हैं, वे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सही संकेत नहीं हैं। उनके मुताबिक विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए एजेंसियों और धनबल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
उन्होंने कहा, “बीजेपी जो कर रही है, राजनीतिक दलों को तोड़ रही है, विपक्ष को कमजोर कर रही है, ईडी और पैसों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, ये लोकतंत्र के लिए बहुत घातक है. हर एक को इसके खिलाफ अपनी आवाज उठानी चाहिए.”
TMC में टूट को लेकर भी जताई चिंता
केजरीवाल ने तृणमूल कांग्रेस का उदाहरण देते हुए कहा कि जब जनता किसी पार्टी के उम्मीदवारों को चुनकर संसद भेजती है और बाद में वे दूसरी राजनीतिक दिशा में चले जाते हैं, तो इससे मतदाताओं का विश्वास प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा, “जो हो रहा है वो गलत है. लोगों ने तृणमूल कांग्रेस को वोट दिया और 28 या 29 सांसद चुने. क्योंकि उन्हें पार्टी पर भरोसा था. इसके बाद उनमें से 20-22 अलग हो गए और किसी पार्टी को समर्थन दे दिया, ये तो सरासर गलत है.”
गोवा में मुफ्त बिजली की मांग दोहराई
राजनीतिक मुद्दों के अलावा अरविंद केजरीवाल ने गोवा सरकार से बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों को भारी बिजली बिलों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए सरकार को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की योजना लागू करनी चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने 15 जून 2026 तक के बकाया बिजली बिल माफ करने की भी मांग रखी। केजरीवाल का दावा है कि यदि राज्य सरकार उनकी इन दोनों मांगों को स्वीकार कर लेती है तो गोवा की करीब 76 प्रतिशत आबादी का बिजली बिल शून्य हो सकता है।