ईरान और अमेरिका के बीच हालिया तनाव को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि अमेरिका के साथ हुई हालिया लड़ाई को तेहरान अपने 47 वर्षों के इतिहास की पहली सैन्य जीत के रूप में देख रहा है। इस बयान के साथ ही ईरान ने भविष्य की शांति वार्ता और समझौते को लेकर भी अपनी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं।
ईरानी नेतृत्व का मानना है कि इस संघर्ष के नतीजों ने अमेरिका के साथ होने वाली संभावित बातचीत में उसकी स्थिति को पहले से अधिक मजबूत बना दिया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि आगे की प्रक्रिया काफी हद तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों पर निर्भर करेगी।
खामेनेई के सैन्य सलाहकार ने किया बड़ा दावा
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला Mojtaba Khamenei के सैन्य सलाहकार Mohsen Rezaei ने CNN को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान ने पहली बार किसी सैन्य संघर्ष में जीत हासिल की है।
उन्होंने कहा, “यह पहली बार है जब ईरान ने लड़ाई में जीत हासिल की है, जबकि इससे पहले वह हमेशा हारता रहा है.”
रेज़ाई के अनुसार, इस संघर्ष ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान की रणनीतिक स्थिति को मजबूत किया है।
शांति समझौते के लिए 24 अरब डॉलर की मांग
मोहसेन रेज़ाई ने बताया कि फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत रुकी हुई है और एक कमजोर युद्धविराम के कारण स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि किसी स्थायी शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अमेरिका को ईरान के फ्रीज किए गए फंड में से 24 अरब डॉलर जारी करने होंगे। ईरान चाहता है कि यह राशि दो चरणों में दी जाए। पहले चरण में 12 अरब डॉलर और दूसरे चरण में 12 अरब डॉलर जारी किए जाएं।
रेज़ाई के मुताबिक, इस कदम से यह संकेत मिलेगा कि अमेरिका वास्तव में समझौते और बातचीत के लिए गंभीर है। उन्होंने कहा, “अब फैसला ट्रंप के हाथ में है.”
फिर युद्ध हुआ तो अमेरिकी ठिकाने होंगे निशाने पर
ईरानी अधिकारी ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा युद्ध छिड़ता है तो तेहरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है।
उन्होंने दावा किया कि संभावित संघर्ष का दायरा केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव फारस की खाड़ी, लाल सागर और भूमध्य सागर तक फैल सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल व्यापक युद्ध की संभावना कम दिखाई देती है।
ट्रंप और मोज्तबा खामेनेई की मुलाकात से किया इनकार
मोहसेन रेज़ाई ने स्पष्ट किया कि मोज्तबा खामेनेई और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बीच किसी भी तरह की सीधी मुलाकात की संभावना नहीं है।
उन्होंने यह भी बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रबंधन को लेकर ईरान और Oman के बीच समन्वय की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा ईरान ने अमेरिका पर पूर्व में समझौतों से पीछे हटने का आरोप लगाते हुए कहा कि भविष्य में किसी नई परमाणु संधि पर भरोसा करना उसके लिए आसान नहीं होगा।
अमेरिका-ईरान संबंधों पर फिर बढ़ी नजरें
ईरानी अधिकारी के इस बयान के बाद एक बार फिर अमेरिका और ईरान के संबंध अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गए हैं। जहां एक ओर तेहरान खुद को मजबूत स्थिति में बताने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर संभावित शांति वार्ता और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दे दोनों देशों के बीच आगे की दिशा तय कर सकते हैं।