होर्मुज में ईरान का नया दांव! ‘टोल-कलेक्टर’ जहाज की एंट्री से बढ़ा तनाव, क्या दुनिया के जहाजों से होगी वसूली?

अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों से शुल्क वसूली के लिए एक विशेष जहाज तैनात करने की तैयारी की है। इस कदम को क्षेत्र में ईरान के बढ़ते प्रभाव और नियंत्रण स्थापित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

मरीन ट्रैफिक ने दी ‘टोल-कलेक्टर’ जहाज की जानकारी

दुनियाभर के समुद्री जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने वाली संस्था मरीन ट्रैफिक ने ईरान के एक नए जहाज का खुलासा किया है। संस्था के अनुसार, इस जहाज का नाम ‘IRGC टोल कलेक्ट’ रखा गया है।

जहाज के नाम से ही स्पष्ट है कि इसे ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से जोड़ा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह जहाज फिलहाल केशम द्वीप के पास स्थित IRGC के नौसैनिक अड्डे पर लंगर डाले हुए है। हालांकि इसके गंतव्य (डेस्टिनेशन) के तौर पर “टोल कलेक्शन” दर्ज किया गया है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

आत्मघाती नौकाओं से अलग है यह जहाज

जानकारी के अनुसार, यह जहाज उन तेज रफ्तार छोटी नौकाओं जैसा नहीं है जिनका इस्तेमाल IRGC अतीत में सैन्य अभियानों या दुश्मन देशों के जहाजों को निशाना बनाने के लिए करता रहा है।

बताया जा रहा है कि यह मूल रूप से एक ड्रेजर शिप है, जिसका उपयोग बंदरगाहों और जलमार्गों में जमा कीचड़ और तलछट हटाने के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने संभवतः इस जहाज को नए उद्देश्य के लिए तैयार किया है।

युद्ध में भारी नुकसान के बाद बदली रणनीति?

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल के साथ हालिया संघर्ष के दौरान ईरान की नौसैनिक क्षमताओं को बड़ा नुकसान पहुंचा था। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि युद्ध के दौरान ईरान के करीब 150 छोटे और बड़े जहाज नष्ट कर दिए गए थे।

ऐसे में माना जा रहा है कि उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए ईरान ने इस ड्रेजर शिप को कथित तौर पर टोल वसूली से जुड़े अभियान के लिए तैयार किया है।

सार्वजनिक इनकार, लेकिन बढ़ रहे संकेत

हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय और सरकारी प्रवक्ताओं ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाने की बात से सार्वजनिक रूप से इनकार किया है, लेकिन सामने आई जानकारियां अलग तस्वीर पेश करती दिखाई दे रही हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, IRGC पहले ही होर्मुज में संभावित शुल्क व्यवस्था को “पर्यावरण टैक्स” का नाम दे चुका है। इसके अलावा ईरान ने ओमान के साथ मिलकर तेल टैंकरों और अन्य वाणिज्यिक जहाजों के संचालन और प्रबंधन के लिए एक नई प्रणाली विकसित करने की योजना की भी घोषणा की है।

होर्मुज में पहले भी लगा चुका है नियंत्रण

अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी थी। इसके कारण तेल टैंकरों, एलपीजी कैरियर जहाजों और अन्य वाणिज्यिक पोतों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी।

उस दौरान वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी नौसेना और IRGC ने क्षेत्र में ड्रोन, मिसाइल और समुद्री बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल किया था, जिससे कई जहाजों को नुकसान पहुंचा था।

नया रूट मैप और अनुमति व्यवस्था

कुछ सप्ताह पहले ईरान ने घोषणा की थी कि वाणिज्यिक जहाज होर्मुज से गुजर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें IRGC से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद जहाजों से टोल वसूली की योजना की जानकारी सामने आई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके लिए ईरान ने पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) नामक एक नई संस्था का भी गठन किया है। साथ ही होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए नया समुद्री मार्ग भी जारी किया गया, जो लारक द्वीप के उत्तर और दक्षिण से होकर गुजरता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक समुद्री व्यापार जगत और तेल बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि ईरान वास्तव में इस योजना को किस रूप में लागू करता है और इसका अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर क्या असर पड़ता है।

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