देशभर में चर्चा का विषय बने NEET पेपर लीक मामले में Supreme Court of India ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने National Testing Agency (NTA) की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एजेंसी ने पिछले विवादों से कोई सबक नहीं लिया। साथ ही परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर जवाब तलब किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने NTA और मॉनिटरिंग कमेटी से मांगा जवाब
जस्टिस P. S. Narasimha और जस्टिस Alok Aradhe की बेंच ने NTA को मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि एजेंसी को यह बताना होगा कि हाई पावर्ड कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं।
इसके अलावा, परीक्षा सुधारों के लिए गठित राधाकृष्णन कमेटी को भी अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 29 मई को तय की गई है।
NEET परीक्षा रद्द होने के बाद बढ़ा विवाद
मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली NEET परीक्षा इस वर्ष 3 मई को कराई गई थी। हालांकि पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। अब दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है।
पेपर लीक विवाद के बाद छात्रों और मेडिकल संगठनों में भारी नाराजगी देखने को मिली है। इसी को लेकर कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं।
याचिकाओं में उठीं कई बड़ी मांगें
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और Indian Medical Association के प्रवक्ता Dhruv Chauhan समेत कई याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की है कि 21 जून को होने वाली परीक्षा पेन-पेपर मोड के बजाय कंप्यूटर आधारित कराई जाए।
इसके अलावा परीक्षा की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता वाली हाई पावर्ड कमेटी से कराने की भी मांग की गई है। याचिकाओं में NTA को भंग कर नई परीक्षा एजेंसी गठित करने की अपील भी शामिल है।
कोर्ट ने फिलहाल मांगों पर नहीं दी टिप्पणी
सोमवार, 25 मई को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की मांगों पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की। हालांकि बेंच ने यह जरूर कहा कि वह पहले NTA और राधाकृष्णन कमेटी का पक्ष देखना चाहती है, उसके बाद ही कोई आदेश जारी किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने याद दिलाया कि 2024 में NEET-UG पेपर लीक के बाद केंद्र सरकार ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई थी।