पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शांति वार्ता को बड़ा झटका लगा है। Ali Khamenei ने साफ कर दिया है कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को देश से बाहर नहीं भेजेगा। इस फैसले को अमेरिका की प्रमुख मांगों को सीधे तौर पर खारिज करने के रूप में देखा जा रहा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों का मानना है कि सुप्रीम लीडर के इस रुख से क्षेत्र में युद्ध खत्म करने और स्थायी शांति स्थापित करने की कोशिशें और ज्यादा जटिल हो सकती हैं।
ईरान ने यूरेनियम भंडार पर अपनाया सख्त रुख
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई ने निर्देश दिया है कि देश में मौजूद समृद्ध यूरेनियम का भंडार ईरान के भीतर ही रखा जाए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष खत्म करने को लेकर कूटनीतिक बातचीत जारी है।
ईरानी सूत्रों ने संकेत दिया है कि तेहरान अब परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर किसी बड़े समझौते के मूड में नहीं दिख रहा है।
ट्रंप ने इजरायल को क्या भरोसा दिया था?
रॉयटर्स के मुताबिक, इजरायली अधिकारियों ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इजरायल को भरोसा दिलाया था कि किसी भी संभावित शांति समझौते में ईरान के अधिकतर इनरीच्ड यूरेनियम भंडार को देश से बाहर हटाने का प्रावधान शामिल होगा।
लेकिन अब खामेनेई के बयान ने इस संभावना को लगभग खत्म कर दिया है, जिससे वार्ता के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।
परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से विवाद
United States, Israel और कई पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान पर परमाणु हथियार बनाने की क्षमता विकसित करने का आरोप लगाते रहे हैं। यह विवाद उस समय और गहरा गया जब ईरान ने यूरेनियम को 60 प्रतिशत तक समृद्ध कर लिया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, 60 फीसदी तक यूरेनियम संवर्धन नागरिक उपयोग की जरूरतों से कहीं अधिक माना जाता है और इसे परमाणु हथियार निर्माण के काफी करीब समझा जाता है।
हालांकि ईरान लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है और उसका कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
नेतन्याहू ने रखीं युद्ध खत्म करने की शर्तें
इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को हटाने, प्रॉक्सी मिलिशिया को समर्थन बंद करने और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने पर सहमत नहीं होता, तब तक संघर्ष समाप्त नहीं हो सकता।
नेतन्याहू के इस बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है।
शांति प्रयासों पर मंडराया संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के ताजा रुख के बाद अमेरिका, इजरायल और पश्चिमी देशों के साथ चल रही बातचीत और कठिन हो सकती है। अगर दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे, तो क्षेत्र में सैन्य तनाव दोबारा बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।