अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच रविवार को करीब 30 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई। इस बातचीत ने मिडिल ईस्ट में एक बार फिर नए तनाव की आशंकाओं को बढ़ा दिया है।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच कई सप्ताह तक चले संघर्ष के बाद भले ही फिलहाल सीजफायर लागू है, लेकिन क्षेत्र में हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। ट्रंप और नेतन्याहू की बातचीत खत्म होने के तुरंत बाद नेतन्याहू सुरक्षा कैबिनेट की बैठक में शामिल हुए, जबकि दूसरी ओर व्हाइट हाउस ने भी पत्रकारों को साउथ लॉन कार्यक्रम के लिए बुलाया।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का दावा- जंग से बचने की कोशिश में ईरान
अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने फॉक्स न्यूज को बताया कि तेहरान संभावित सैन्य कार्रवाई की वापसी को लेकर चिंतित है और उससे बचने के लिए देरी की रणनीति अपना रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान को आशंका है कि हालात फिर से युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत भी मुख्य रूप से ईरान की स्थिति और आगे की रणनीति पर केंद्रित रही।
ईरान पर हमले को लेकर अभी फैसला बाकी
इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू को अपनी चीन यात्रा से जुड़ी जानकारी भी दी। हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा ईरान को लेकर हुई संभावित सैन्य रणनीति की हो रही है।
वाईनेट की रिपोर्ट के अनुसार, एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि ईरान पर हमले का मुद्दा अभी पूरी तरह तय नहीं हुआ है और अंतिम फैसला ट्रंप को लेना है। अधिकारी ने कहा, “उन्हें खुद इस फैसले से संतुष्ट होना होगा और अगर वे लड़ाई फिर से शुरू करने का फैसला करते हैं तो संभवत इजरायल को भी इसमें शामिल होने के लिए कहा जाएगा.”
ट्रंप की बढ़ती नाराजगी बन सकती है नए संघर्ष की वजह
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की रणनीति और परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर ट्रंप की निराशा लगातार बढ़ रही है। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि यही वजह आगे चलकर नए सैन्य अभियान का कारण बन सकती है।
मिडिल ईस्ट में सक्रिय खुफिया सूत्रों के मुताबिक, ईरान को यह डर सता रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप फिर से सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं। इसी कारण तेहरान कथित तौर पर जानबूझकर बातचीत और फैसलों में देरी कर रहा है, ताकि किसी संभावित हमले को टाला जा सके या उसे जटिल बनाया जा सके।
मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ सकती है अस्थिरता
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और इजरायल ने दोबारा सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना, तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट पर पड़ सकता है। पहले से ही इजरायल, लेबनान और ईरान के बीच बढ़ता तनाव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती बना हुआ है।
हालांकि अभी तक किसी नए सैन्य अभियान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ट्रंप और नेतन्याहू की बातचीत ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।