Naravane Memoir Controversy: जो उचित समझो वो करो का असली मतलब क्या था? पूर्व सेना प्रमुख ने तोड़ी चुप्पी, सियासत गरम

भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़े एक कथन को लेकर शुरू हुई बहस अब और तेज हो गई है। पूर्व सेना प्रमुख General Manoj Mukund Naravane ने अपनी अप्रकाशित किताब Four Stars of Destiny को लेकर उठे विवाद पर खुलकर बात की है और ‘जो उचित समझो वो करो’ वाले बयान का असली अर्थ स्पष्ट किया है।

‘जो उचित समझो वो करो’—इसका मतलब क्या था?

हाल ही में एक इंटरव्यू में जनरल नरवणे ने कहा कि यह टिप्पणी दरअसल सरकार के सशस्त्र बलों पर “पूरे भरोसे” को दर्शाती है। उन्होंने साफ किया कि इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, उस समय सेना को जमीनी हालात के अनुसार निर्णय लेने की पूरी स्वतंत्रता यानी फ्री हैंड दिया गया था।

उन्होंने कहा कि यह संदेश इस बात का संकेत था कि सरकार को सेना, उसके नेतृत्व और सेवा प्रमुखों पर पूरा विश्वास था और जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

संसद में क्यों बढ़ा विवाद?

इस मुद्दे ने तब तूल पकड़ा जब नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने संसद में इस किताब के एक अंश का जिक्र करने की कोशिश की। हालांकि, किताब के अप्रकाशित होने के कारण उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया।

इसके बावजूद राहुल गांधी ने दावा किया कि ‘जो उचित समझो, वो करो’ कथित तौर पर सीमा तनाव के दौरान रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने प्रधानमंत्री की ओर से जनरल नरवणे तक पहुंचाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन की सेना भारतीय सीमा में आगे बढ़ रही थी, लेकिन सरकार की ओर से उचित प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

नरवणे की चेतावनी और पाकिस्तान पर टिप्पणी

पूर्व सेना प्रमुख ने इस बयान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी पर नाराजगी जताई और कहा कि भारत की सशस्त्र सेनाएं पूरी तरह राजनीति से दूर रहती हैं। उन्होंने इशारों में पाकिस्तान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा हमारे पड़ोसी देशों में नहीं देखा जाता।

क्या है पूरी किताब का मामला?

Four Stars of Destiny दरअसल जनरल नरवणे के करियर पर आधारित एक मेमॉयर है, जिसे 2024 में प्रकाशित किया जाना था। हालांकि, अभी तक इसे रक्षा मंत्रालय की मंजूरी नहीं मिली है, जिसके चलते इसका प्रकाशन टाल दिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 31 अगस्त 2020 को चीन की सेना रेचिन ला क्षेत्र की ओर बढ़ रही थी, उसी दौरान यह पूरा घटनाक्रम सामने आया था। इसी संदर्भ में यह कथन चर्चा में आया, जिसने अब राजनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर बहस छेड़ दी है।

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