संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर हुई अहम वोटिंग में बड़ा उलटफेर देखने को मिला. लोकसभा में मतदान के बाद यह बिल पारित नहीं हो सका, जिससे देश की आधी आबादी की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है.
वोटिंग के दौरान कुल 489 मत पड़े, जिनमें से 278 पक्ष में और 211 विरोध में थे. हालांकि, इस विधेयक को पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी था, जो पूरा नहीं हो पाया.
बाद में लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने स्पष्ट किया कि अंतिम गणना में 298 वोट पक्ष में और 230 विरोध में पड़े, फिर भी आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण बिल गिर गया.
पीएम मोदी ने किया था समर्थन का आह्वान
बहस के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सभी दलों से इस बिल के समर्थन की अपील की थी. सरकार इसे महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में बड़ा कदम बता रही थी, लेकिन विपक्ष ने इस पर गंभीर आपत्तियां जताईं.
अमित शाह ने परिसीमन की जरूरत बताई
गृह मंत्री Amit Shah ने सदन में कहा कि देश में अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में भारी असमानता है.
उन्होंने कहा, “किसी क्षेत्र में 49 लाख मतदाता हैं तो कहीं केवल 60 हजार. ऐसी स्थिति में सांसद के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाना मुश्किल हो जाता है.”
इसी असमानता को दूर करने के लिए परिसीमन की जरूरत बताई गई.
राहुल गांधी का हमला, बोले- “छलावा है बिल”
विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने इस विधेयक का जोरदार विरोध करते हुए इसे “छलावा” करार दिया. उन्होंने कहा, “यह बिल यहीं गिर जाएगा.”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह वास्तव में महिलाओं के हित में नहीं है, बल्कि इसके जरिए चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश की जा रही है.
सरकार बनाम विपक्ष, सियासी टकराव तेज
जहां सरकार इस विधेयक को महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में अहम कदम बता रही थी, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति और संरचनात्मक बदलाव का हिस्सा मान रहा है.
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर सियासी सहमति अभी भी दूर है.