महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम तेज, PM के पत्र पर भड़के खरगे-बोले, हमें विश्वास में लिए बिना क्यों बुलाया विशेष सत्र?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर महिला आरक्षण कानून को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों में चल रहे चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने से यह धारणा बनती है कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए इस कानून को जल्दबाजी में लागू करना चाहती है। खरगे का यह पत्र प्रधानमंत्री द्वारा 16 अप्रैल से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने के संदर्भ में भेजे गए पत्र के जवाब में आया है।

पहले सर्वसम्मति से पास, फिर देरी क्यों?

राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने अपने पत्र में लिखा, ‘‘मुझे अभी-अभी 16 अप्रैल से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए संसद के विशेष सत्र के संबंध में आपका पत्र प्राप्त हुआ है.’’
उन्होंने याद दिलाया कि ‘‘जैसा कि आप जानते हैं कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को संसद ने सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया था. उस समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से मैंने मांग की थी कि यह महत्वपूर्ण कानून तत्काल प्रभाव से लागू होना चाहिए.’’

सर्वदलीय बैठक की उठी मांग

खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में तत्काल लागू करने के लिए सहमति की बात कही थी, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने लिखा, ‘‘तब से 30 महीने बीत चुके हैं और अब हमें विश्वास में लिए बिना यह विशेष बैठक बुलाई गई है और आपकी सरकार परिसीमन के बारे में कोई जानकारी दिए बिना हमसे फिर से सहयोग मांग रही है. आप समझ सकते हैं कि परिसीमन और अन्य पहलुओं के विवरण के बिना इस ऐतिहासिक कानून पर कोई सार्थक चर्चा करना असंभव होगा.’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘आपने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि आपकी सरकार ने इस संबंध में राजनीतिक दलों के साथ बातचीत की है. हालांकि, मुझे यह बताते हुए खेद है कि यह सच्चाई के विपरीत है क्योंकि सभी विपक्षी दल सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि 29 अप्रैल 2026 को मौजूदा दौर के चुनाव समाप्त होने के बाद संविधान संशोधनों पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए.’’

कांग्रेस का आरोप—राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी

खरगे ने आरोप लगाया कि चुनावों के बीच विशेष सत्र बुलाना इस बात को साबित करता है कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के बजाय राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यह लिखते हुए भी दुख हो रहा है कि सार्वजनिक महत्व के मामलों में सरकार का पिछला रिकॉर्ड किसी भी तरह का विश्वास पैदा नहीं करता- चाहे वह नोटबंदी हो, जीएसटी हो, जनगणना हो या फिर संघीय ढांचे से संबंधित मामले जैसे वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करना और करों का हस्तांतरण.’’

संवैधानिक संशोधनों पर भी जताई चिंता

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन केंद्र और राज्यों दोनों को प्रभावित करेंगे, इसलिए सभी दलों और राज्यों की राय लेना जरूरी है। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा, ‘‘अगर विशेष बैठक का उद्देश्य ‘हमारे लोकतंत्र को मजबूत करना’ और ‘सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है’, जैसा कि आपने पत्र में लिखा है, तो मैं सुझाव दूंगा कि सरकार परिसीमन मुद्दे पर चर्चा करने के लिए 29 अप्रैल के बाद किसी भी समय एक सर्वदलीय बैठक बुलाए.’’

आने वाले विशेष सत्र पर नजर

प्रधानमंत्री और खरगे के बीच यह पत्राचार संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र से पहले हुआ है। माना जा रहा है कि इस सत्र में सरकार 2029 के आम चुनावों से पहले महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या 816 तक बढ़ाने (जिसमें 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी) से जुड़े विधेयक ला सकती है।

कांग्रेस ने पहले भी उठाए थे सवाल

कांग्रेस ने हाल ही में आरोप लगाया था कि महिला आरक्षण कानून के नाम पर राजनीति की जा रही है और इससे जुड़ा परिसीमन ‘‘संवैधानिक नहीं’’ है तथा इसके ‘‘गंभीर परिणाम’’ हो सकते हैं। पार्टी ने यह भी तय किया है कि 16 से 18 अप्रैल तक होने वाले विशेष सत्र को लेकर विपक्षी दलों की साझा रणनीति बनाई जाएगी।

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