मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जारी टकराव के बीच अमेरिका को अपने ही सहयोगी देशों से बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां एक ओर ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें सहयोगी देशों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाने से नाराज़गी का सामना करना पड़ रहा है। खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं, लेकिन कई यूरोपीय देशों ने इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने से दूरी बना ली है।
फ्रांस समेत 4 देशों ने अमेरिकी सैन्य विमानों को नहीं दी अनुमति
दरअसल, फ्रांस, इटली, स्पेन और स्विटजरलैंड ने अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने एयरस्पेस या सैन्य ठिकानों के उपयोग की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इन देशों के फैसले से अमेरिका की सैन्य रणनीति प्रभावित हुई है और इससे वॉशिंगटन की योजनाओं पर भी असर पड़ा है। माना जा रहा है कि सहयोगी देशों के इस रुख ने अमेरिका की कूटनीतिक स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
ट्रंप ने सहयोगी देशों पर जताई नाराज़गी
ईरान युद्ध के बीच सहयोगी देशों के इस रवैये से डोनाल्ड ट्रंप काफी नाराज नजर आए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब भविष्य में इन देशों को अमेरिकी मदद की जरूरत पड़ेगी, तब संयुक्त राज्य अमेरिका भी उनका साथ नहीं देगा. ट्रंप ने नाटो सहयोगी देशों पर तंज कसते हुए यह तक कह दिया कि वे या तो अमेरिका से एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) खरीदें या फिर Strait of Hormuz से खुद जाकर तेल लेकर आएं.
ब्रिटेन ने युद्ध से बनाई दूरी, लेकिन बढ़ाई सैन्य तैनाती
यूनाइटेड किंगडम ने भी इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने से इनकार कर दिया, हालांकि उसने क्षेत्र में अपने हितों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सैन्य बल और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात करने का फैसला किया है. ब्रिटेन का कहना है कि उसका उद्देश्य सीधे युद्ध में कूदना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना और संभावित हमलों से अपने नागरिकों व सहयोगियों की रक्षा करना है.
अलग-अलग रणनीतियों ने बढ़ाई वैश्विक जटिलता
मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि भले ही अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगी नाटो के सदस्य हों, लेकिन ईरान संघर्ष को लेकर सभी देशों की प्राथमिकताएं और रणनीतियां अलग-अलग हैं। यही कारण है कि इस बार अमेरिका को वैश्विक स्तर पर अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पा रहा है, जिससे भू-राजनीतिक समीकरण और अधिक जटिल होते जा रहे हैं।
अमेरिका की सख्त चेतावनी और युद्ध लंबा खिंचने के संकेत
दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध डोनाल्ड ट्रंप की शर्तों पर ही समाप्त होगा। उन्होंने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि उसे अमेरिकी फैसलों को स्वीकार करना होगा। वहीं, ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट से बातचीत में दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को पूरी तरह कमजोर कर दिया है और अब उसके पास ज्यादा ताकत नहीं बची है.
उन्होंने यह भी कहा कि जो देश Strait of Hormuz का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें खुद आगे बढ़कर इसे खोलना चाहिए. ट्रंप ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह खत्म करने में भी पीछे नहीं हटेगा, हालांकि फिलहाल उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों, और जैसे ही यह लक्ष्य पूरा होगा, होर्मुज स्ट्रेट अपने आप खुल जाएगा.