मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ईरान के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) के प्रमुख अली लारीजानी की एयर स्ट्राइक में मौत हो गई। तेहरान ने मंगलवार (17 मार्च) को उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि की। इससे पहले इजरायल ने उन्हें निशाना बनाने की बात कही थी।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने बयान जारी कर कहा कि अली लारीजानी अपने बेटे और बॉडीगार्ड के साथ शहीद हो गए। परिषद ने उन्हें इस्लामी गणराज्य की सेवा करने वाला शहीद बताते हुए कहा, “शहीदों की पवित्र आत्माओं ने ईश्वर के सेवक, शहीद डॉ. अली लारीजानी की पवित्र आत्मा को गले लगा लिया.”
लारीजानी की मौत के बाद तेज हुए मिसाइल और ड्रोन हमले
अली लारीजानी की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने पूरे इलाके में मिसाइल और ड्रोन हमलों की रफ्तार तेज कर दी है। वहीं तेहरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के अहम मार्ग होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपनी निगरानी और नियंत्रण सख्त कर दिया है।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ये हमले ईरान के नेतृत्व को कमजोर करने के उद्देश्य से किए गए थे। हालांकि, ईरान के भीतर व्यापक अशांति के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं और लोग लगातार हमलों से बचने के लिए सुरक्षित ठिकानों में शरण ले रहे हैं।
मौत से पहले डोनाल्ड ट्रंप को दी थी चेतावनी
अपनी मौत से करीब एक सप्ताह पहले अली लारीजानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था, “ईरान जैसा बलिदानी राष्ट्र आपकी खोखली धमकियों से नहीं डरता. आपसे बड़े लोग भी ईरान को खत्म नहीं कर सके. सावधान रहें, कहीं आप खुद ही खत्म न हो जाएं.”
यह बयान अब उनकी मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में फिर से चर्चा का विषय बन गया है।
कौन थे अली लारीजानी?
अली लारीजानी को ईरान की राजनीति, सुरक्षा और कूटनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिना जाता था। वे देश के एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से आते थे, जिसकी तुलना अक्सर अमेरिका के कैनेडी परिवार से की जाती है।
उनके भाई सादेक लारिजानी ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख रह चुके हैं, जबकि मोहम्मद जवाद लारिजानी विदेश नीति के वरिष्ठ सलाहकार रहे हैं।
अली लारीजानी ने अपने राजनीतिक करियर में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। वे 2008 से 2020 तक ईरान की संसद के अध्यक्ष रहे और बाद में सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख बने, जो देश की रक्षा और विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने वाली शीर्ष संस्था मानी जाती है।