स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। दो भारतीय जहाज — शिवालिक और नंदा देवी — कुल 92,712 मीट्रिक टन गैस लेकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
पाकिस्तानी एक्सपर्ट कमर चीमा ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान सरकार को ईरान से बातचीत करनी चाहिए कि पाकिस्तान के जहाजों को उसी तरह अनुमति क्यों नहीं मिल रही है।
भारतीय जहाजों को अनुमति पर पाक एक्सपर्ट की प्रतिक्रिया
कमर चीमा ने कहा कि भारत में ईरानी राजदूत ने बताया है कि भारतीय जहाज होर्मुज के रास्ते से गुजर सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब क्षेत्र में ट्रैफिक पर रोक जैसी स्थिति है तो क्या भारत को मिली सुविधा पाकिस्तान के लिए भी उपलब्ध है या नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कतर से एलएनजी सप्लाई प्रभावित होती है तो पाकिस्तान के लिए ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
“ईरान भारत को कभी नाराज नहीं करेगा” — कमर चीमा
कमर चीमा ने कहा कि भारत में भी गैस की कमी की आशंका हो सकती है, लेकिन ईरान ऐसा कदम नहीं उठाएगा। उनके मुताबिक ईरान क्षेत्रीय स्तर पर अपने संबंध मजबूत करना चाहता है और भारत उसके लिए महत्वपूर्ण साझेदार है।
उन्होंने कहा कि दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरती है और भारत को मिली इस राहत को लेकर पाकिस्तान में सवाल उठ रहे हैं।
पाकिस्तान सरकार की भूमिका पर उठाए सवाल
कमर चीमा ने कहा, ‘ईरान के राष्ट्रपति को भारत ने फोन किया है और हमारी सरकार क्या कर रही है? पाकिस्तान ने ईरान पर हमलों की निंदा की. अयातुल्लाह खामेनेई की मौत पर भी अफसोस जताया और हमें क्या मिला. मुझे इस पर क्लेरिटी नहीं है कि हमारे जहाजों को होर्मुज से आने दिया जा रहा है या नहीं क्योंकि हमारी सरकार तो कुछ नहीं कह रही है.’
उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान में लोगों को यह बात खटक रही है कि ईरान भारत को तेल और गैस ले जाने की अनुमति दे रहा है, जबकि पाकिस्तान ने कई मुद्दों पर ईरान का समर्थन किया।
भारत-ईरान रिश्तों पर भी की टिप्पणी
कमर चीमा ने कहा, ‘ईरान कभी भी इंडिया को नाराज नहीं करेगा, वो भारत को मैनेज करना चाहता है क्योंकि भारत बड़ा मुल्क है, उसके साथ ईरान को बिजनेस करना है. पाकिस्तानियों को बुरा लगता है, लेकिन बुरा लगने वाली कोई बात नहीं है. यहां आपको रिश्तों को बैलेंस करके चलना होता है.’
उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारिक दृष्टि से ईरान भारत को ज्यादा उपयुक्त साझेदार मानता है और चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट इसके उदाहरण हैं।
सरकार को ईरान से बातचीत की सलाह
कमर चीमा ने कहा कि पाकिस्तान सरकार को तुरंत ईरान से बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान सरकार को भी ईरानी सरकार से बात करनी चाहिए कि हमारे जहाज वहां से क्यों नहीं आ रहे हैं. सरकार को इस पर बात करनी चाहिए क्योंकि ये जंग लंबी है.’
उन्होंने चेतावनी दी कि ऊर्जा संकट बढ़ने पर पाकिस्तान सरकार के लिए सब्सिडी जारी रखना मुश्किल हो जाएगा और देश को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से और कर्ज लेना पड़ सकता है।