ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बुधवार (11 मार्च) को उत्तर प्रदेश में 81 दिनों की विशाल परिक्रमा यात्रा का ऐलान किया। इस यात्रा को ‘गविष्ठि यात्रा’ नाम दिया गया है। यह यात्रा 3 मई से शुरू होकर 23 जुलाई तक चलेगी। यात्रा की शुरुआत गोरखपुर से होगी और समापन भी गोरखपुर में ही किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस यात्रा का उद्देश्य राजनीतिक नहीं बल्कि धार्मिक और सामाजिक होगा। उन्होंने कहा, “हम बिल्कुल राजनीति नहीं करेंगे. गाय की रक्षा की बात करेंगे और तथ्य के साथ जनता के सामने रखेंगे.”
जहां से शुरुआत, वहीं होगा समापन
शंकराचार्य ने बताया कि यात्रा का समापन उसी स्थान पर होगा जहां से इसकी शुरुआत की जाएगी। उन्होंने कहा कि 24 जुलाई को सभी लोग फिर एकत्र होंगे और सभा आयोजित की जाएगी, चाहे बारिश ही क्यों न हो। इस दौरान उन्होंने नागा सेना की तर्ज पर ‘चतुरंगिणी’ निर्माण का भी ऐलान किया।
भाजपा पर साधा निशाना
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि अब भाजपा ‘भागपा’ बन गई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह राजनीतिक सभा नहीं बल्कि धर्म से जुड़ा आयोजन है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री के पूरे प्रयासों के बाद हुआ “शंखनाद” है।
कांशीराम और मायावती का किया उल्लेख
अपने संबोधन में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि कांशीराम जी गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद करते थे और उसी प्रदेश में उनकी शिष्या मायावती चार बार सत्ता में आईं। उन्होंने कहा कि समाज और प्रजा के कल्याण को सर्वोपरि रखना चाहिए।
सनातन धर्म और परंपराओं पर भी बोले शंकराचार्य
शंकराचार्य ने धार्मिक विषयों पर बोलते हुए कहा कि वेद पढ़ने वाले बटुकों के सम्मान पर सवाल उठाना गलत है और ब्राह्मण तपस्या के लिए जन्म लेता है, सुख भोग के लिए नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि “शंकराचार्य सनातन धर्म की ‘सुप्रीम कोर्ट’ है.” साथ ही उन्होंने कहा कि यह भीड़ तंत्र नहीं बल्कि विचारों का तंत्र है और हर सवाल का जवाब दिया जाएगा।