राष्ट्रपति मुर्मू प्रोटोकॉल विवाद: मायावती बोलीं – अति-दुर्भाग्यपूर्ण, संवैधानिक पदों का राजनीतिकरण न हो

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के कार्यक्रम से जुड़े प्रोटोकॉल विवाद पर अब बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख Mayawati ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि देश में संवैधानिक पदों का सम्मान किया जाना चाहिए और उनका किसी भी तरह से राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।

राष्ट्रपति पद के सम्मान की बात

बीएसपी सुप्रीमो Mayawati ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारतीय संविधान के आदर्शों के अनुसार राष्ट्रपति पद का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल का पालन करना भी उतना ही जरूरी है और इस पद का किसी भी रूप में राजनीतिक इस्तेमाल ठीक नहीं है।

‘अति-दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया घटनाक्रम

मायावती ने कहा कि वर्तमान में देश की राष्ट्रपति Droupadi Murmu एक महिला होने के साथ-साथ आदिवासी समाज से भी आती हैं। ऐसे में उनके दौरे के दौरान जो स्थिति सामने आई, वह नहीं होनी चाहिए थी।

उन्होंने पूरे घटनाक्रम को “अति-दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और कहा कि इससे संवैधानिक पदों की गरिमा प्रभावित होती है।

संसद के कामकाज पर भी जताई चिंता

अपने बयान में Mayawati ने संसद के कामकाज को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से संसद में, खासकर Om Birla (लोकसभा अध्यक्ष) के पद को लेकर भी राजनीतिकरण की प्रवृत्ति बढ़ती दिख रही है।

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि संवैधानिक संस्थाओं और पदों का सम्मान दलगत राजनीति से ऊपर उठकर किया जाना चाहिए।

कैसे शुरू हुआ विवाद

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब राष्ट्रपति Droupadi Murmu पश्चिम बंगाल के Siliguri में आयोजित एक आदिवासी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं।

आरोप है कि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Mamata Banerjee या राज्य सरकार का कोई वरिष्ठ मंत्री मौजूद नहीं था और आयोजन स्थल पर पर्याप्त व्यवस्थाएं भी नहीं थीं।

इसके बाद भाजपा ने टीएमसी सरकार पर राष्ट्रपति और आदिवासी समाज के अपमान का आरोप लगाया, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया।

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