दिल्ली आबकारी नीति (शराब घोटाला) मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी किए जाने के बाद सियासत में भूचाल आ गया है। इस ऐतिहासिक फैसले पर समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक लंबा पोस्ट लिखकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है और इस मामले को सीधे तौर पर ‘शंकराचार्य विवाद’ और ‘आजादी के इतिहास’ से जोड़ दिया है।
‘सत्य और न्याय आज केजरीवाल के साथ खड़े हैं’
अखिलेश यादव ने केजरीवाल को दोषमुक्त किए जाने का स्वागत करते हुए लिखा, “आज दिल्ली के लोकप्रिय पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ सत्य और न्याय दोनों खड़े हैं। आरोप कभी इतना बड़ा नहीं हो सकता कि वह सच को ढक ले। आज हर एक ईमानदार व्यक्ति राहत की सांस लेगा और भाजपा के समर्थक शर्म से आत्म-लज्जित हो रहे होंगे। भाजपा ने दिल्ली की जनता के साथ बड़ा विश्वासघात किया है।”
शंकराचार्य विवाद का जिक्र कर BJP को घेरा
सपा प्रमुख ने इस फैसले को हाल ही में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर लगे आरोपों से जोड़ते हुए बीजेपी को ‘कपटजीवी’ करार दिया।
- उन्होंने लिखा, “जो कपटजीवी सनातनी शंकराचार्य जी, साधु-संतों और संन्यासियों तक पर झूठे आरोप लगाने का महापाप कर सकते हैं, वे भला किसी सरकार, दल या व्यक्ति को बदनाम करने के लिए किस हद तक जा सकते हैं, इसकी कल्पना कोई शरीफ आदमी कर ही नहीं सकता।”
‘आजादी के दीवानों की मुखबिरी करने वालों का नैतिक मृत्युदंड’
अखिलेश ने बीजेपी (और परोक्ष रूप से आरएसएस) के इतिहास पर सबसे तीखा तंज कसते हुए कहा:
- “आजादी से पहले वर्तमान सत्ता के जो संगी-साथी देश के दुश्मनों (अंग्रेजों) से मिले हुए थे और जिन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए ‘मुखबिरी’ की, जो साम्राज्यवादियों के माफी-वजीफे पर पलते थे… वे छल-कपट वाले सत्ताधारी आज किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं बचे हैं।”
- उन्होंने इस अदालती फैसले को बीजेपी के लिए एक ‘नैतिक मृत्युदंड’ करार दिया।
जेल से ‘दोषमुक्त’ होने तक का संघर्ष
आपको बता दें कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए गिरफ्तार होने वाले अरविंद केजरीवाल देश के पहले सीएम थे।
- उन्हें 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया गया था और 13 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी।
- जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि जब तक जनता की अदालत और कानून उन्हें ‘निर्दोष’ साबित नहीं कर देते, वे कुर्सी पर नहीं बैठेंगे।
- वहीं, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को भी जमानत मिलने से पहले लगभग 17 महीने जेल में बिताने पड़े थे।