राजधानी दिल्ली में आयोजित ‘AI समिट’ (AI Summit) में घुसकर विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार यूथ कांग्रेस (Youth Congress) के 5 कार्यकर्ताओं को पटियाला हाउस कोर्ट ने 3 दिन की पुलिस कस्टडी (रिमांड) में भेज दिया है। अदालत ने मामले की जांच के लिए पुलिस को समय देते हुए 1 मार्च 2026 को इन सभी आरोपियों को दोबारा पेश करने का आदेश दिया है।
किन 5 आरोपियों को मिली रिमांड?
इन पांच आरोपियों में से तीन कार्यकर्ताओं (सौरभ, अरबाज और सिद्धार्थ) को शिमला से गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो अन्य आरोपी (अजय और राजा गुर्जर) पहले से ही पुलिस की गिरफ्त में थे।
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में किए ये बड़े दावे:
पुलिस ने रिमांड की मांग करते हुए अदालत के सामने कई चौंकाने वाली बातें रखीं:
- छपवाई गईं 1 लाख से ज्यादा टी-शर्ट: पुलिस के मुताबिक, इस प्रदर्शन के लिए बड़े पैमाने पर 1 लाख से अधिक टी-शर्ट छपवाई गई थीं। इन टी-शर्ट्स का डिजाइन आरोपी सिद्धार्थ ने तैयार किया था।
- व्हाट्सएप ग्रुप और साजिश: पुलिस ने बताया कि सौरभ सिंह ने इस पूरे प्रदर्शन की प्लानिंग के लिए एक खास व्हाट्सएप (WhatsApp) ग्रुप बनाया था। सौरभ और सिद्धार्थ समिट के अंदर नहीं गए थे, जबकि अरबाज खान ने अंदर घुसकर प्रदर्शन को अंजाम दिया।
- फंडिंग की जांच जरूरी: पुलिस का तर्क है कि इस पूरे मामले के पीछे की बड़ी साजिश, इसकी फंडिंग और अन्य लोगों की भूमिका की गहराई से जांच करने के लिए आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करना बेहद जरूरी है।
- ‘कानून का खौफ नहीं’: पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जांच में शामिल सभी लोग कांग्रेस पार्टी से जुड़े हैं। ये लोग लगातार पुलिस से छिप रहे थे और इन्हें कानून का कोई डर नहीं है।
बचाव पक्ष (यूथ कांग्रेस) की दलील- ‘राजनीतिक साजिश है’
आरोपियों के वकील ने पुलिस की रिमांड का कड़ा विरोध करते हुए कोर्ट में कहा:
- ‘पेपर लीक’ के खिलाफ था प्रदर्शन: वकील ने स्पष्ट किया कि वहां कोई ‘हेट स्पीच’ नहीं दी गई। ये युवा केवल देश में हो रहे ‘पेपर लीक’ के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रहे थे।
- विपक्ष को निशाना बनाने का आरोप: बचाव पक्ष ने दावा किया कि यह एक राजनीतिक साजिश है, जिसके तहत विपक्षी पार्टी के युवा विंग को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। मामले में 11 लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
- ‘JNU जैसा केस बनाया जा रहा’: वकील ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शन के सारे वीडियो और फुटेज मौजूद हैं। पुलिस की FIR बिल्कुल JNU के ‘टुकड़े-टुकड़े’ मामले जैसी लग रही है, जो पूरी तरह से कानूनी सिद्धांतों का मजाक है।