प्रयागराज के झूंसी थाने में यौन शोषण और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बाद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का पहला और बेहद आक्रामक बयान सामने आया है। अपने ऊपर लगे इन गंभीर आरोपों को उन्होंने एक ‘नीच प्रहार’ और ‘धर्म युद्ध’ की शुरुआत करार दिया है। एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत करते हुए शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पुलिस प्रशासन पर सीधे तौर पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
‘गौ हत्यारे और योगी आदित्यनाथ कितनी नीचता पर जा सकते हैं, यह दिख रहा है’
एफआईआर दर्ज होने पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा, “मुझे यह अनुमान तो था कि मुझ पर प्रहार होगा, लेकिन इतना नीच प्रहार होगा, इसकी मैंने कभी कल्पना नहीं की थी। अब यह भी देखा जा रहा है कि गौ हत्यारे कितनी नीचता पर जा सकते हैं। योगी आदित्यनाथ जैसे लोग कितनी नीचता पर जा सकते हैं, यह साफ दिख रहा है। धर्म युद्ध शुरू हो चुका है और सामने से बम-गोले आ रहे हैं।”
शंकराचार्य ने जांच और गिरफ्तारी पर क्या कहा?
- जांच में पूरा सहयोग: अगली कानूनी कार्रवाई पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पुलिस की जांच में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “जब किसी पर आरोप लगता है, तो उसे गलत सिद्ध करने के लिए कोई भी तैयार रहता है, हम भी पूरी तरह तैयार हैं।”
- गिरफ्तारी का डर नहीं: गिरफ्तारी की संभावना पर बेबाकी से जवाब देते हुए शंकराचार्य ने कहा, “मुख्यमंत्री की पुलिस जिस तरीके से काम कर रही है, उसमें बटुकों का अपमान हुआ है। वे गिरफ्तारी की संभावना का लाभ उठा सकते हैं। सबको पता है वे क्या करेंगे, लेकिन हम तैयार बैठे हैं। हम कभी भागे हों तो बताइए। जो गिरफ्तार करना चाहते हैं, करें। हम हर प्रश्न का उत्तर देने के लिए तैयार हैं।”
आरोप लगाने वाले को बताया ‘हिस्ट्रीशीटर’
शंकराचार्य ने खुद पर आरोप लगाने वाले व्यक्ति (शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी) की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया, “जिसने आरोप लगाया है, वह एक हिस्ट्रीशीटर है जिसकी लंबी आपराधिक सूची है। वह खुला घूम रहा है और खुद को जगद्गुरु का शिष्य बता रहा है, लेकिन पुलिस उस पर कोई कार्रवाई नहीं करती। इसका मतलब है कि पुलिस अपराधियों को खुला छोड़ रही है और सज्जनों को बेड़ियों में जकड़ रही है।”
राक्षस मारीच-ताड़का से की तुलना, खुद को बताया ‘सूर्य’
इस पूरे घटनाक्रम की तुलना पौराणिक काल से करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि जैसे प्राचीन समय में ताड़का और मारीच जैसे राक्षसों ने महर्षि विश्वामित्र के पवित्र यज्ञ में बाधा डाली थी, आज भी वैसा ही हो रहा है। उन्होंने कहा कि सैकड़ों अधिवक्ताओं और आम लोगों का उन्हें भारी समर्थन मिल रहा है। सनातन धर्म के नाम पर कुछ लोगों की नीचता के खिलाफ शुरू हुआ यह ‘धर्म युद्ध’ अब रुकेगा नहीं। खुद को सत्य के मार्ग पर बताते हुए उन्होंने कहा, “हम सूर्य हैं; इसलिए नहीं कि हमें कोई अभिमान है, बल्कि इसलिए क्योंकि हमने सत्य को पकड़ा है। सूरज सत्य के समान है, जिसकी आभा को कोई भी नहीं ढक सकता।”