यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर देश भर में जारी बवाल के बीच अब जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने एक बेहद कड़ा और ज्वलंत बयान दिया है। सवर्ण समाज के विरोध के बीच उन्होंने केंद्र सरकार को खुली चेतावनी दी है कि उनके धर्माचार्य रहते इस विवादित कानून को किसी भी कीमत पर लागू नहीं किया जा सकता। शुक्रवार (20 फरवरी 2026) को यूपी के बस्ती में आयोजित एक रामकथा कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर सरकार को इस देश को ‘गृहयुद्ध’ से बचाना है, तो उसे हर हाल में यह कानून वापस लेना ही पड़ेगा।
‘समाज में क्यों किया जा रहा है भेदभाव?’
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने यूजीसी गाइडलाइंस की जरूरत पर सीधा सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने पूछा कि आखिर समाज में इस तरह का विभाजन और भेदभाव क्यों किया जा रहा है? उनका स्पष्ट मानना है कि समाज का यह बंटवारा कतई स्वीकार्य नहीं है और देश हित में इस कानून को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।
मांस-मदिरा वाले ब्राह्मणों पर नाराजगी, दिया ‘महाभारत’ का उदाहरण
जातिवाद के मुद्दे पर बोलते हुए रामभद्राचार्य ने कहा कि ब्राह्मण कभी जातिवादी नहीं रहा है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर गहरा दुख जताया कि दुर्भाग्य से आजकल अनेक ब्राह्मण मांस-मछली और शराब का सेवन करने लगे हैं; ऐसे ब्राह्मणों को स्वयं अपने पतन के प्रति जागरूक होना होगा।
पौराणिक इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु वशिष्ठ ने हमेशा छुआछूत का विरोध किया, निषाद राज का आदर किया और सभी वर्गों को समान शिक्षा दी। उन्होंने एक बड़ा उदाहरण देते हुए कहा कि अगर द्रोणाचार्य ने कर्ण को शिक्षा देने से मना नहीं किया होता, तो शायद ‘महाभारत’ का महायुद्ध कभी नहीं होता। इसके साथ ही उन्होंने बस्ती का नाम बदलकर ‘वशिष्ठ नगर’ किए जाने की मांग को भी दोहराया।
आखिर क्या है UGC का यह विवाद?
गौरतलब है कि यूजीसी की नई गाइडलाइंस का सवर्ण समाज द्वारा व्यापक स्तर पर विरोध किया जा रहा है (हाल ही में लखनऊ के परिवर्तन चौक पर भी बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला है)। वहीं दूसरी तरफ, ओबीसी (OBC), एससी (SC) और एसटी (ST) वर्ग के लोग इस नियम का पुरजोर समर्थन कर रहे हैं और इसे लागू करने की मांग पर अड़े हैं। इस बढ़ते सामाजिक तनाव और विवाद को देखते हुए फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों के लागू होने पर रोक (Stay) लगा रखी है।