उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान हुए विवाद ने अब एक नया और विस्फोटक मोड़ ले लिया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के बयान पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पाठक के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि उनके (ब्रजेश पाठक) भीतर यह बात काफी दिनों से दबी हुई थी, जो अब बाहर आई है। शंकराचार्य ने कहा कि ब्रजेश पाठक की बात सनातन धर्म की बात है और उन्हें यह सुनकर अच्छा लगा। उन्होंने कहा, “यह प्रसन्नता का विषय है कि कम से कम यूपी का एक नेता इस विषय को समझ रहा है.”
एबीपी लाइव से बातचीत में शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा और बेहद कठोर हमला बोला। उन्होंने कहा, “समय बीतने दीजिए, एक-एक व्यक्ति बोलेगा कि आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार) नाम के जो व्यक्ति थे, वह अत्याचार की सीमा पार कर गए. गौ और ब्राह्मण पर प्रहार कर रहा थे, कंस और दुर्योधन जैसा काम कर रहा थे.” शंकराचार्य ने कहा कि बड़े पदों पर बैठे लोगों को अन्याय करने का लाइसेंस नहीं मिल जाता। उनकी दृष्टि में जो कुछ हुआ वह पाप है और पापी को उसका फल जरूर मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी शिखा ही नहीं, बल्कि ध्वज को भी अपमानित किया गया है, जो सनातन धर्म पर सीधा आघात है।
शंकराचार्य ने दावा किया कि केवल ब्रजेश पाठक ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के अंदर सैकड़ों ऐसे लोग हैं जो मानते हैं कि सनातन धर्म का अपमान हुआ है, लेकिन डर के मारे बोल नहीं पा रहे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “यह बात भारतीय जनता पार्टी को माननी पड़ेगी, नहीं तो पार्टी मिट जाएगी. भय दिखाकर शासन करना गलत दिशा में राज करने जैसा है.” उन्होंने बताया कि कई बीजेपी नेताओं ने उनसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर माफी मांगी है और कहा है कि गलत हुआ है, लेकिन वे खुलकर सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। उनका मानना है कि बीजेपी के अपने लोग ही इस स्थिति से ज्यादा पीड़ित हैं।