मेयर चुनाव: उद्धव गुट ने दिया धोखा, BJP की झोली में डाली कुर्सी, भड़की कांग्रेस बोली- सौदेबाजी हुई है

महाराष्ट्र के चंद्रपुर मेयर चुनाव में एक बड़ा और चौंकाने वाला राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है. महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन को झटका देते हुए उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का साथ दिया, जिसके चलते बीजेपी अपना मेयर बनाने में कामयाब हो गई. कांग्रेस, जो सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, हाथ मलती रह गई. कांग्रेस ने अब पार्षदों की खरीद-फरोख्त का गंभीर आरोप लगाया है.

‘पार्षदों की मंडी सजाई गई’

चुनाव नतीजों के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बीजेपी और अपने सहयोगियों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, “पार्षदों की खरीद-फरोख्त हुई. इस घटनाक्रम का राज्य पर असर पड़ेगा.” सपकाल का मानना है कि मेयर पद पर बीजेपी की जीत के लिए उद्धव ठाकरे की शिवसेना, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम (AIMIM) और प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) जिम्मेदार हैं.

जीत का गणित: एक वोट से पलटा खेल

चंद्रपुर महानगरपालिका में मेयर पद के लिए हुए चुनाव में बीजेपी की संगीता खांडेकर को 32 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 31 वोट मिले. बीजेपी उम्मीदवार महज एक वोट से जीत गईं. इस जीत के बदले में डिप्टी मेयर का पद उद्धव गुट को दिया गया है, जिस पर शिवसेना (UBT) के प्रशांत दानव चुने गए हैं.

गठबंधन धर्म पर सवाल

हर्षवर्धन सपकाल ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “एआईएमआईएम के समर्थन की वजह से बीजेपी को बढ़त मिली, जबकि प्रकाश अंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन अघाड़ी मतदान के दौरान अनुपस्थित रही. अगर वंचित बहुजन अघाड़ी, जिसके साथ हमने नगर निकाय चुनावों में वास्तविक गठबंधन किया था, ने कांग्रेस का समर्थन किया होता, तो हमारा उम्मीदवार जीत जाता.” उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के पार्षद एकजुट थे, लेकिन बाहरी ताकतों ने खेल बिगाड़ दिया.

नंबर गेम: कांग्रेस के पास थीं सबसे ज्यादा सीटें

66 सदस्यीय चंद्रपुर महानगरपालिका के नतीजे बताते हैं कि जनादेश कांग्रेस के पक्ष में था, लेकिन समीकरण बीजेपी ने साध लिए:

  • कांग्रेस: 27 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी)
  • बीजेपी: 23 सीटें
  • शिवसेना (UBT): 6 सीटें
  • जनविकास सेना: 3 सीटें
  • VBA: 2 सीटें
  • AIMIM/BSP/शिवसेना: 1-1 सीट

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