वाशिंगटन/नई दिल्ली: हफ्तों की अनिश्चितता और तनाव के बाद आखिरकार भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ‘ट्रेड डील’ (Trade Deal) पर मुहर लग गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात (2 फरवरी 2026) भारत पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ में बड़ी कटौती का ऐलान कर दिया. अब भारतीय सामानों पर सिर्फ 18% टैरिफ लगेगा, जो पहले 50% तक पहुंच गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे दोनों लोकतंत्रों के लिए ऐतिहासिक बताया है.
वो 4 शर्तें जिन पर बनी बात (रूसी तेल पर फंसा पेंच?)
इस डील के पीछे अमेरिका ने 4 प्रमुख शर्तें रखी हैं, जिनमें रूस से तेल खरीद का मुद्दा सबसे अहम है:
- बाजार के दरवाजे खुलेंगे: भारत अमेरिकी उत्पादों के लिए अपनी ‘ट्रेड बैरियर्स’ (व्यापारिक बाधाएं) कम करेगा और अमेरिकी कंपनियों को भारतीय बाजार में ज्यादा पहुंच देगा.
- रूसी तेल पर ट्रंप का दावा: ट्रंप ने दावा किया है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने या कम करने पर सहमत हो गया है. बदले में भारत अब अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदेगा. (हालांकि, पीएम मोदी ने अपने बयान में रूसी तेल पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की है).
- टैरिफ पेनल्टी हटी: अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर जो 25% अतिरिक्त टैरिफ (Penalty) लगाया था, उसे हटाने की बात कही गई है.
- शॉपिंग लिस्ट तैयार: डील के तहत भारत अमेरिका से भारी मात्रा में खरीदारी करेगा. इसमें ऊर्जा, डिफेंस, एयरक्राफ्ट, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और कृषि उत्पाद शामिल होंगे. इससे अमेरिकी निर्यात को बूस्ट मिलेगा.
युद्ध रोकने का ट्रंप कार्ड?
डोनाल्ड ट्रंप ने इस डील को यूक्रेन युद्ध से जोड़ते हुए कहा कि जब भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा, तो मॉस्को पर आर्थिक दबाव पड़ेगा और इससे युद्ध खत्म करने में मदद मिलेगी.
उद्योग जगत में खुशी की लहर
इस समझौते से भारतीय शेयर बाजार और उद्योग जगत में उत्साह है. सुनील मित्तल, कुमार मंगलम बिड़ला और अनीश शाह जैसे दिग्गजों ने इसे ‘गेम चेंजर’ बताया है. उनका मानना है कि इससे भारत ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा.