नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रविवार (1 फरवरी 2026) को पेश किए गए आम बजट (Union Budget 2026) पर विपक्ष ने तीखे तेवर दिखाए हैं. समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी और सांसद डिंपल यादव ने इस बजट को सिरे से खारिज करते हुए इसे “बहुत ही निराशावादी” करार दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बजट में शब्दों का ऐसा मायाजाल बुना है जो आम जनता की समझ से बाहर है.
‘न महिला, न किसान, न जवान… किसी के लिए कुछ नहीं’
डिंपल यादव ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि इस बजट में समाज के किसी भी वर्ग के लिए राहत की बात नहीं है. उन्होंने कहा, “इस बजट में न महिलाओं के लिए कुछ है, न युवाओं के लिए और न ही विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र के लिए. देश में शिक्षा और स्वास्थ्य का स्तर लगातार गिर रहा है, लेकिन बजट में उसे सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं.”
‘तकनीकी भाषा का खेल, किसान फिर खाली हाथ’
सपा सांसद ने बजट की भाषा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें जानबूझकर ऐसी तकनीकी भाषा का इस्तेमाल किया गया है जो आम आदमी को समझ ही न आए. किसानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा, “हर बार बजट से हमारे किसान भाइयों को उम्मीद होती है, लेकिन मैं समझती हूं कि इस बजट में उनके लिए भी कुछ नहीं है. उनके हाथ फिर खाली रह गए हैं.”
बजट से पहले ही उठाए थे सवाल: ‘पुराने वादों का क्या हुआ?’
बजट पेश होने से पहले भी डिंपल यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि यह सराहनीय है कि देश की एक महिला वित्त मंत्री बजट पेश कर रही हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि जनता को जमीनी स्तर पर क्या लाभ मिल रहा है? उन्होंने सरकार से पूछा कि पिछले बजटों में किए गए बड़े-बड़े वादे कितने पूरे हुए हैं?
गौरतलब है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत पूरे विपक्ष ने आरोप लगाया है कि बजट में राज्यों, निर्यातकों और महंगाई से जूझ रही जनता के लिए ठोस प्रावधानों की भारी कमी है.