ट्रंप की धमकी से थर्राया ईरान, न्यूक्लियर प्लांट के दरवाजे मिट्टी से पाट दिए, अमेरिका के हमले के डर से अंडरग्राउंड किलाबंदी शुरू

तेहरान/वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘वेनेजुएला जैसे एक्शन’ और ‘भयानक हमले’ वाली धमकी का असर अब जमीन पर दिखने लगा है. अमेरिका के संभावित हवाई हमले के खौफ से ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों को अभेद्य किले में बदलना शुरू कर दिया है. बीते 24 घंटों में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने दुनिया को चौंका दिया है, जिसमें ईरान के इस्फहान (Isfahan) स्थित परमाणु केंद्र पर भारी हलचल देखी गई है. ईरान ने हमले से बचने के लिए अपने अंडरग्राउंड न्यूक्लियर प्लांट के एंट्री गेट्स को मिट्टी डालकर बंद करना शुरू कर दिया है.

मिट्टी से पाट दिए गए मुख्य और दक्षिणी दरवाजे

इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने इस्फहान न्यूक्लियर प्लांट के अंडरग्राउंड परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार को मिट्टी से पूरी तरह भर दिया है. इतना ही नहीं, दक्षिणी प्रवेश द्वार पर भी ताजा मिट्टी डाली जा रही है ताकि वहां का रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो जाए और किसी भी बाहरी हमले का असर भीतर तक न पहुंच सके. यह वही प्लांट है जिसे पिछले साल अमेरिकी हमलों में भारी नुकसान पहुंचा था.

408 किलो यूरेनियम बचाने की जद्दोजहद

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की इस हताशापूर्ण तैयारी का मुख्य मकसद वहां स्टोर किए गए करीब 408 किलो संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को बचाना है. इससे पहले, मेंटेनेंस के लिए इन द्वारों को खोला गया था और सुरंगों को बेहद मजबूत कंक्रीट से रिपेयर किया गया था. लेकिन ट्रंप के अल्टीमेटम के बाद अब इन्हें दोबारा हमेशा के लिए सील किया जा रहा है.

सेंट्रीफ्यूज बिल्डिंग में भी संदिग्ध गतिविधियां

सैटेलाइट तस्वीरों ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. जमीन के ऊपर मौजूद उस इमारत में भी काम चल रहा है, जहां पहले ‘सेंट्रीफ्यूज’ (यूरेनियम को बम बनाने लायक बनाने वाली मशीन) बनाए जाते थे. अमेरिका और इजरायल का आरोप है कि ईरान सिविल प्रोग्राम की आड़ में परमाणु बम बना रहा है, जबकि ईरान इससे इनकार करता आया है.

बातचीत के बजाय ‘जंग’ की तैयारी?

गौरतलब है कि ट्रंप ने हाल ही में बिना शर्त समझौते की बात कही थी और धमकी दी थी कि अगर डील नहीं हुई तो अंजाम बुरा होगा. इसके जवाब में ईरान ने साफ कर दिया है कि वह दबाव में बातचीत नहीं करेगा. अब परमाणु ठिकानों की यह ‘किलाबंदी’ संकेत दे रही है कि ईरान कूटनीति से ज्यादा युद्ध की तैयारियों पर भरोसा कर रहा है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *