नई दिल्ली: भारत मंडपम में आयोजित भारत-यूरोपीय यूनियन बिजनेस फोरम के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसकी गूंज वाशिंगटन तक सुनाई देगी. भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को उन्होंने एक नए युग की शुरुआत बताया. अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक नीतियों की आलोचना करते हुए वैश्विक व्यापार में मची उथल-पुथल पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ‘आज दुनिया में ट्रेड, टेक्नोलॉजी और रेयर अर्थ मिनरल्स का इस्तेमाल हथियार की तरह किया जा रहा है.’
ट्रंप की ‘कब्जा नीति’ और यूरोप का पलटवार
पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकियों ने अमेरिका और यूरोप के बीच दूरियां बढ़ा दी हैं. दरअसल, ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड में मौजूद ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ पर है, जो आधुनिक तकनीक के लिए बेहद जरूरी हैं. दावोस में यूरोपीय देशों ने एकजुट होकर ट्रंप की 10 फीसदी टैरिफ वाली धमकी का करारा जवाब दिया था और बदले में ‘ट्रेड बाजूका’ (Trade Bazooka) का इस्तेमाल करने की चेतावनी दी थी. पीएम मोदी ने संकेत दिया कि इन नीतियों से एक नया ग्लोबल ऑर्डर बन रहा है.
‘यह नए युग का शंखनाद है’- पीएम मोदी
भारत और ईयू के बीच बढ़ती नजदीकियों पर खुशी जताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘यह भारत यूरोपियन यूनियन रिश्तों में एक नए युग का शंखनाद है.’ उन्होंने इस साझेदारी को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, ‘पहली बार यूरोपियन यूनियन के लीडर्स, उनका भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना, दोनों के बीच इतिहास का सबसे बड़ा FTA संपन्न होना और आज इतने सारे CEOs के साथ इतने बड़े लेवल पर इंडिया-यूरोपियन यूनियन बिजनेस फॉरम आयोजित होना… ये सब उपलब्धियां विश्व के दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच हो रहे अभूतपूर्व एलाइनमेंट का प्रतीक है.’
व्यापार दोगुना हुआ, 6 हजार कंपनियां भारत में सक्रिय
आर्थिक आंकड़ों के जरिए रिश्तों की मजबूती बयां करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि यूरोपीय संघ में भारतीय निवेश 40 अरब यूरो तक पहुंच चुका है. उन्होंने कहा, ‘पिछले 10 वर्षों में हमारा व्यापार दोगुना होकर 180 बिलियन यूरो तक पहुंच गया है. भारत में 6 हजार से अधिक यूरोपीय कंपनियां काम कर रही हैं.’ उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों के बीच रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में गहरा सहयोग स्थापित हो रहा है.
भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाने पर जोर
भविष्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर एनर्जी, जल प्रबंधन और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया. उन्होंने बाहरी निर्भरता कम करने पर जोर देते हुए पूछा, ‘क्या हमारे व्यापारिक समुदाय मिलकर इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी और चिप्स जैसे क्षेत्रों में बाहरी निर्भरता को कम कर सकते हैं? क्या हम मिलकर एक विश्वसनीय और भरोसेमंद वैकल्पिक सप्लाई चेन का निर्माण कर सकते हैं?’ उनका इशारा साफ था कि भारत और यूरोप को मिलकर एक आत्मनिर्भर तंत्र विकसित करना होगा.