लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत जारी ड्राफ्ट लिस्ट पर सियासी घमासान शुरू हो गया है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने शनिवार को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं. उन्होंने कन्नौज सदर विधानसभा सीट का हवाला देते हुए दावा किया कि वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी है और आयोग सत्ताधारी दल के इशारे पर काम कर रहा है.
कन्नौज में मिले डुप्लीकेट वोटर्स, भाजपा पर साधा निशाना
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी लोकसभा सीट कन्नौज के अंतर्गत आने वाली सदर विधानसभा के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि वहां मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर खामियां हैं. उन्होंने सबूत के तौर पर डुप्लीकेट वोटर्स की लिस्ट दिखाई. अखिलेश ने आशंका जताई कि वोटर लिस्ट पुनरीक्षण की तारीखों को दो बार इसलिए बढ़ाया गया क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की तैयारी पूरी नहीं थी. उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की है कि उनकी टेक्निकल टीम सपा कार्यकर्ताओं को भी इस प्रक्रिया की ट्रेनिंग दे ताकि गड़बड़ियों को पकड़ा जा सके.
आयोग के ‘शुद्ध मतदाता सूची’ वाले वादे की दिलाई याद
एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण मामला है. इससे जुड़ी खबरें लगातार सामने आ रही हैं.” उन्होंने 4 नवंबर 2025 का जिक्र करते हुए कहा कि जब आयोग ने पुनरीक्षण की घोषणा की थी, तब यह भरोसा दिलाया गया था कि ‘मतदाताओं की सूची में कोई कमी नहीं रहेगी’ और यह प्रक्रिया पूरी तरह ‘शुद्ध व समावेशी’ होगी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है.
पूरे यूपी के आंकड़ों पर जताई चिंता
अखिलेश यादव ने तकनीक के इस्तेमाल पर आयोग के दावों को घेरते हुए कहा, “निर्वाचन आयोग ने कहा था कि मैपिंग और प्रौद्योगिकी की मदद से मतदाताओं की सूची को पूरी तरह से सटीक बनाया जाएगा और कोई भी मतदाता बाहर नहीं रहेगा. हालांकि हम कई अनिमितताएं होती देख रहे हैं.” उन्होंने कन्नौज का उदाहरण देते हुए पूरे प्रदेश की स्थिति पर चिंता जाहिर की और कहा, “अगर एक विधानसभा क्षेत्र में यह स्थिति है, तो पूरे राज्य में क्या हो रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.”
अफसरों और सरकार की मिलीभगत का आरोप
अखिलेश यादव ने सीधा आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारी सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे संवैधानिक संस्थाओं की साख पर बट्टा लग रहा है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अब निष्पक्षता से अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है, और शायद यही कारण है कि प्रक्रिया की तारीखों में बार-बार बदलाव किया गया ताकि हेरफेर की गुंजाइश बनी रहे.