बिहार के लिए यह गौरव का क्षण है। स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और हाईटेक बनाने की दिशा में बिहार ने पूरे देश में परचम लहराया है। ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय समीक्षा बैठक में यह घोषणा की गई है कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के प्रभावी कार्यान्वयन में बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान मिला है। यह उपलब्धि बताती है कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में अब लंबी लाइनों और कागजी कार्यवाही की जगह डिजिटल सिस्टम ने ले ली है।
‘भव्या’ ऐप बनी गेम चेंजर
इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ मुख्यमंत्री डिजिटल स्वास्थ्य योजना के तहत शुरू की गई “भव्या” (Bihar Health Application Visionary Plan for All) प्रणाली का है।
- शुरुआत: नवंबर 2023 में लॉन्च।
- विस्तार: राज्य के सभी 594 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों (जिला अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक) में इसे लागू किया गया है।
- फायदा: इससे अस्पतालों में ‘कागज रहित’ (Paperless) और सुव्यवस्थित स्वास्थ्य प्रणाली स्थापित हुई है, जिसकी निगरानी जिला से लेकर ब्लॉक स्तर तक रियल टाइम में की जा रही है।
आंकड़ों में देखें बिहार की ‘नंबर-1’ परफॉर्मेंस
बिहार ने सिर्फ रैंकिंग में ही नहीं, बल्कि कई पैमानों पर रिकॉर्ड तोड़े हैं:
- स्कैन एंड शेयर (Scan & Share): मरीजों को ओपीडी में लंबी लाइनों से बचाने वाली इस सुविधा के तहत बिहार ने अब तक 5.21 करोड़ टोकन जनरेट किए हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है। इसमें बिहार प्रथम स्थान पर है।
- आभा (ABHA) कार्ड: राज्य में अब तक 6.80 करोड़ लोगों के डिजिटल हेल्थ कार्ड (ABHA ID) बनाए जा चुके हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR): मरीजों की हेल्थ हिस्ट्री डिजिटल रखने के मामले में बिहार ने देश में चौथा स्थान हासिल किया है।
- प्रोत्साहन राशि: डिजिटल स्वास्थ्य प्रोत्साहन योजना (DHIS) के तहत 7,835 सरकारी अस्पतालों ने 37.60 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि का दावा किया है, जो पूरे भारत में सर्वाधिक है।
ग्लोबल लेवल पर भी मिला सम्मान
बिहार की इस ‘भव्या’ परियोजना की गूंज सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी सुनाई दी है। इसके नवाचार और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए इसे ‘ग्लोबल डिजिटल हेल्थ समिट 2024’ में इनोवेशन अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग ने इसका श्रेय सीएम नीतीश कुमार के विजन और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के मार्गदर्शन को दिया है।