भारत और बांग्लादेश के बीच जारी कूटनीतिक तनाव के बीच बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने एक बार फिर तीखे तेवर दिखाए हैं। विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में भारत के खिलाफ बड़ा बयान दिया है। उन्होंने हिंदुओं की सुरक्षा और हमलों को लेकर भारत की चिंताओं को खारिज करते हुए उल्टा जवाब दिया और नसीहत दे डाली कि भारत को अपने अल्पसंख्यकों की चिंता करनी चाहिए, बांग्लादेश अपना मामला खुद संभाल लेगा। हुसैन का यह बयान ऐसे समय आया है जब 12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश में संसदीय चुनाव होने वाले हैं।
‘हमने ऐसा क्या किया जिससे रिश्ते बिगड़े?’
तौहीद हुसैन ने भारत के साथ बिगड़ते रिश्तों पर सफाई देते हुए गेंद भारत के पाले में डाल दी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है जिससे रिश्ते खराब हों। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, ‘दिल्ली में मेरे समकक्षों से पूछा जा सकता है कि बांग्लादेश की तरफ से कोई सख्त कदम उठाया गया है या नहीं.’ साथ ही, उन्होंने भारत द्वारा ढाका से अपने राजनयिकों को वापस बुलाने के फैसले पर नाराजगी जताई। हुसैन ने दावा किया, ‘इसका कोई सबूत नहीं है कि हम भारतीयों की सुरक्षा नहीं कर पाए. ऐसे में दिल्ली का यह फैसला हमें अच्छा नहीं लगता.’
हिंदुओं की सुरक्षा पर तीखा पलटवार
जब उनसे बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों और भारत की चिंता के बारे में पूछा गया, तो तौहीद हुसैन ने बेहद रूखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि हम भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाली कार्रवाइयों पर बयानबाजी नहीं करते, इसलिए उम्मीद करते हैं कि भारत भी यही नीति अपनाए। हुसैन ने दो टूक कहा, ‘हमारे नागरिकों के खिलाफ ज्यादती होगी तो हमारे पास उससे निपटने का तंत्र है. भारत अपने अल्पसंख्यकों का ध्यान रखे तो ज्यादा अच्छा है. हम अपना काम खुद कर लेंगे.’
पाकिस्तान से दोस्ती पर सफाई और हसीना पर तंज
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने पाकिस्तान के साथ बढ़ते रिश्तों और पूर्व पीएम शेख हसीना पर भी बात की:
- पाकिस्तान से रिश्ते: हुसैन ने कहा कि शेख हसीना के शासनकाल में पाकिस्तान के साथ जानबूझकर रिश्ते खराब किए गए थे। अब हम बस उन्हें सामान्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘किसी देश से बेहतर रिश्ते चाहने में क्या गलत है? हम एक पड़ोसी देश के नाते उनसे सामान्य रिश्ता चाहते हैं.’
- शेख हसीना पर निशाना: उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की आलोचना करते हुए कहा कि उम्मीद थी कि वे भारत में रहकर ऐसे बयान नहीं देंगी जो बांग्लादेश के मौजूदा हालात से मेल नहीं खाते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।