पाकिस्तान को पानी के लिए तरसाने का प्लान? चिनाब पर 4 बाहुबली प्रोजेक्ट्स की रफ्तार तेज

नई दिल्ली/श्रीनगर: सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर चल रही तनातनी के बीच भारत ने पाकिस्तान की ‘दुखती रग’ पर हाथ रख दिया है। केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जम्मू-कश्मीर का दौरा कर चिनाब नदी (Chenab River) पर बन रहे 4 बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को ‘मिशन मोड’ में पूरा करने का आदेश दिया है।

ये 4 प्रोजेक्ट्स पाकिस्तान की नींद क्यों उड़ा रहे हैं?

चिनाब नदी पाकिस्तान की ‘लाइफलाइन’ मानी जाती है, क्योंकि वहां की 90% खेती और आबादी इसी के पानी पर निर्भर है। भारत अब इन प्रोजेक्ट्स के जरिए पानी के बहाव (Flow) पर रणनीतिक नियंत्रण हासिल कर लेगा।

जानिए उन 4 प्रोजेक्ट्स के बारे में, जिन पर काम तेज हुआ है:

  1. पाकल दुल (Pakal Dul):
    • खासियत: यह 1,000 मेगावाट का प्रोजेक्ट है और पश्चिमी नदियों पर बनने वाला पहला स्टोरेज प्रोजेक्ट है। इसकी ऊंचाई 167 मीटर होगी।
    • डेडलाइन: दिसंबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य।
  2. किरु (Kiru):
    • खासियत: यह ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ (बहते पानी से बिजली बनाना) प्रोजेक्ट है। ऊंचाई 135 मीटर।
    • डेडलाइन: दिसंबर 2026।
  3. क्वार (Kwar):
    • खासियत: 109 मीटर ऊंचा प्रोजेक्ट। नदी का डायवर्जन जनवरी 2024 में पूरा हो चुका है।
    • डेडलाइन: मार्च 2028।
  4. रतले (Ratle):
    • खासियत: 850 मेगावाट क्षमता। पाकिस्तान ने इसके डिजाइन पर आपत्ति जताई थी, जिसे भारत ने दरकिनार कर दिया।
    • डेडलाइन: 2028।

नया अपडेट: इनके अलावा, दुल्हस्ती स्टेज-2 प्रोजेक्ट को भी दिसंबर 2025 में पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी मिल गई है।

भारत का रुख सख्त क्यों?

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि की समीक्षा और निलंबन के संकेत दिए थे। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि भारत अब संधि के तहत मिले अधिकारों का पूरा इस्तेमाल करेगा और अपने जल संसाधनों (Hydro-power potential) को बर्बाद नहीं होने देगा।

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