नई दिल्ली/पटना: देश भर में तेजी से फैल रहे साइबर अपराध के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जांच एजेंसी ने बैंकिंग सिस्टम के भीतर छिपे उन अधिकारियों को बेनकाब किया है जो परदे के पीछे से साइबर अपराधियों की मदद कर रहे थे। सीबीआई ने अपनी छापेमारी में दो बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें केनरा बैंक की एक असिस्टेंट मैनेजर और एक्सिस बैंक का एक अधिकारी शामिल है। इन दोनों पर आरोप है कि इन्होंने साइबर ठगों के साथ सांठगांठ करके फर्जी खाते (MULE Accounts) खुलवाए और ठगी की रकम को ठिकाने लगाने में उनकी मदद की।
रेड फ्लैग से बचने के तरीके बता रहे थे अफसर
सीबीआई की गहन जांच में आरोपियों की पहचान शालिनी सिन्हा और अभिषेक कुमार के रूप में हुई है। शालिनी सिन्हा अपराध के समय पटना स्थित केनरा बैंक की शाखा में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर तैनात थीं, जबकि अभिषेक कुमार एक्सिस बैंक में बिजनेस डेवलपमेंट एसोसिएट के तौर पर कार्यरत थे। जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इन अधिकारियों ने न केवल फर्जी और संदिग्ध खातों को खोलने व एक्टिव करने में भूमिका निभाई, बल्कि ठगों को बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियां भी बताईं। डिजिटल सबूतों से पता चला है कि उन्होंने अपराधियों को सिखाया कि बैंकिंग निगरानी तंत्र के ‘रेड फ्लैग’ से कैसे बचा जा सकता है। इस ‘कंसल्टेंसी’ के बदले में उन्हें ठगों की तरफ से मोटा फायदा (quid pro quo) भी मिला।
वाराणसी और बेतिया से हुई गिरफ्तारी
केंद्रीय जांच एजेंसी ने इन दोनों आरोपियों को 24 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया। शालिनी सिन्हा को वाराणसी से दबोचा गया, जबकि अभिषेक कुमार की गिरफ्तारी बिहार के बेतिया से हुई। ट्रांजिट रिमांड हासिल करने के बाद अब दोनों को संबंधित अदालत में पेश किया जा रहा है। गौरतलब है कि सीबीआई इस मामले में पहले से ही सख्त एक्शन मोड में है। इससे पहले एजेंसी ने इसी सिंडिकेट के खिलाफ देश भर में 61 ठिकानों पर छापेमारी की थी और 13 लोगों को गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल की थी। अब सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने ‘सफेदपोश’ बैंक अधिकारी शामिल हैं।