मायावती के लिए 41 साल बाद आया सबसे बड़ा संकट, 2026 में इतिहास बन जाएगी संसद में बसपा की आवाज?

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) के सियासी सफर में साल 2026 एक काला अध्याय साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कभी ‘किंग मेकर’ और सत्ता के शिखर पर रहने वाली मायावती की पार्टी आज अपने अस्तित्व के सबसे भीषण संकट से जूझ रही है। राजनीतिक समीकरण और आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि अगले साल यानी 2026 में ऐसा पहली बार होगा जब देश के लोकतंत्र के मंदिर (संसद) में बसपा पूरी तरह से ‘शून्य’ हो जाएगी और सदन में ‘नीला झंडा’ उठाने वाला कोई नहीं बचेगा।

नवंबर 2026 में खाली हो रही है आखिरी सीट

संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में बसपा की उपस्थिति फिलहाल एक सांसद के भरोसे टिकी है। पार्टी के एकमात्र राज्यसभा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त होने जा रहा है। रामजी गौतम साल 2019 में भारतीय जनता पार्टी के अप्रत्यक्ष सहयोग से संसद पहुंचे थे। अगले साल नवंबर में यूपी से कुल 10 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें 8 भाजपा, 1 सपा और 1 बसपा के खाते की है। भाजपा की ओर से हरदीप सिंह पुरी, दिनेश शर्मा और बृजलाल जैसे नेताओं का कार्यकाल पूरा होगा, तो वहीं बसपा से रामजी गौतम की विदाई के साथ ही पार्टी का संसद में प्रतिनिधित्व खत्म हो जाएगा।

1984 से अब तक का सबसे बुरा दौर

मान्यवर कांशीराम ने 14 अप्रैल 1984 को जिस बहुजन मूवमेंट की शुरुआत की थी, उसने बहुत कम समय में विधानसभा से लेकर लोकसभा तक अपनी मजबूत पैठ बना ली थी। लेकिन अब करीब 42 साल बाद ऐसा पहली बार होगा जब संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में बसपा का एक भी सदस्य नहीं होगा। लोकसभा में पार्टी का खाता 2024 में ही नहीं खुल पाया था, और अब राज्यसभा के दरवाजे भी बंद होते दिख रहे हैं। मौजूदा गणित के हिसाब से एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए करीब 37 विधायकों की जरूरत होती है, जबकि यूपी विधानसभा में बसपा के पास अभी सिर्फ 1 विधायक है। ऐसे में रामजी गौतम की सीट बचाना या दोबारा जीतना नामुमकिन है।

आर्श से फर्श तक का सफर

बसपा के गिरते ग्राफ पर नजर डालें तो एक वक्त यह राष्ट्रीय राजनीति में तीसरी बड़ी ताकत थी। साल 2009 में पार्टी ने 6.17% वोट शेयर के साथ 21 लोकसभा सीटें जीती थीं। हालांकि, 2014 की मोदी लहर में पार्टी शून्य पर सिमट गई थी। 2019 में सपा के साथ गठबंधन कर बसपा ने वापसी की और 10 सीटें जीतीं, लेकिन गठबंधन टूटते ही फिर से ढलान शुरू हो गया। 2024 के चुनाव में पार्टी का वोट शेयर गिरकर मात्र 2.07% रह गया और सीटों की संख्या फिर से जीरो हो गई। इतना ही नहीं, यूपी विधान परिषद में भी पार्टी का प्रतिनिधित्व पहले ही खत्म हो चुका है, क्योंकि उनके इकलौते एमएलसी भीमराव अंबेडकर का कार्यकाल भी समाप्त हो गया है।

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