नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है और इसके पीछे सीधे तौर पर पाकिस्तान की साजिश होने का दावा किया है। उन्होंने पड़ोसी देश के हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि वहां एक सोची-समझी रणनीति के तहत अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। गिरिराज सिंह ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ जो भी घटित हो रहा है, वह पाकिस्तान का ही मॉडल है।
गिरिराज सिंह ने तीखे शब्दों में कहा, ‘पाकिस्तान में भी हिंदुओं को खत्म किया गया था और अब बांग्लादेश में भी वही हो रहा है. पड़ोसी मुल्क में जो हो रहा है वह पूरी दुनिया को शर्मसार कर देने वाली घटना है.’ उनके मुताबिक, यह घटनाएं सिर्फ संयोग नहीं हैं, बल्कि इसके तार पाकिस्तानी साजिश से जुड़े हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई चिंता
बांग्लादेश के हालात पर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वहां जारी हिंसा को गंभीर बताया है। यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक ने वहां हो रही मॉब लिंचिंग और हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘सभी बांग्लादेशियों को सुरक्षित महसूस करने की जरूरत है. हम बांग्लादेश में देखी गई हिंसा को लेकर बहुत चिंतित हैं.’
राहुल गांधी के बर्लिन वाले बयान पर भड़के
बांग्लादेश के अलावा गिरिराज सिंह ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा बर्लिन में दिए गए बयानों पर भी कड़ा एतराज जताया। उन्होंने राहुल गांधी पर विदेश की धरती से भारत का अपमान करने का आरोप लगाया और इसे ‘देशद्रोह’ करार दिया। राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘वह पीएम मोदी को गोली देते हैं. देश को गाली देने लगे हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश का नेता प्रतिपक्ष विदेश में ये हरकत कर रहा है.’
दरअसल, राहुल गांधी ने बर्लिन में भारत के चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे। राहुल ने वहां दावा किया था, ‘कांग्रेस ने 2024 में हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव जीते थे, लेकिन ये चुनाव निष्पक्ष नहीं थे. हमने तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में चुनाव जीते हैं. हम भारत में चुनावों की निष्पक्षता को लेकर मुद्दे उठाते रहे हैं. मैंने भारत में प्रेस कॉन्फ्रेंस की हैं, जिनमें हमने स्पष्ट रूप से बिना किसी संदेह के यह दिखाया है कि हमने हरियाणा चुनाव जीता है और हमें नहीं लगता कि महाराष्ट्र चुनाव निष्पक्ष थे.’