बिहार में NDA जीता, लोकतंत्र हारा, चुनावी नतीजों समेत कई मुद्दों पर तेजस्वी यादव खुलकर बोले

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने खुलकर अपनी बात रखी है। चुनाव में RJD की हार के कारणों पर चर्चा करते हुए तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश में एनडीए (NDA) की जीत हुई है लेकिन लोकतंत्र हार गया।

उन्होंने दावा करते हुए कहा कि, “लोग ऐसा बिहार चाहते थे जहां पढ़ाई, कमाई, दवाई, सिंचाई, सुनवाई और कार्रवाई वाली सरकार हो।” तेजस्वी ने आगे कहा कि, “लोकतंत्र हारा है और मशीनरी जीती है। इस चुनाव में उनलोगों ने कोई भी चीज छोड़ा नहीं।”

हमारी हार को कोई भी हजम नहीं कर रहा: तेजस्वी

कपिल सिब्बल के साथ एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे RJD की सीटों की संख्या में आई कमी के बारे में पूछा गया, तो तेजस्वी यादव ने कहा, “इस बात को कोई भी हजम नहीं कर रहा है। खास तौर से बिहार की जनता से भी बात की जाए तो उन्हें भी ये बात नहीं पच रही। बीजेपी, जेडीयू या सत्ता पक्ष के विधायक भी जो चुनाव जीते हैं वो भी विश्वास नहीं कर रहे हैं।”

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि यह जीत रिश्वत के माध्यम से हुई है। उन्होंने कहा, “चुनाव आचार संहिता के 10 दिन पहले 10-10 हजार रुपये बांटे गए। वैसे अलग-अलग योजनाओं में करीब 40 हजार करोड़ रुपये पूरे बिहार में सीधे बांटे गए। आप ये कह सकते हैं कि रिश्वत दी गई है।”

‘डबल इंजन की सरकार’ पर हमला, बेरोजगारी को बताया असल मुद्दा

बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा कि बिहार सबसे गरीब राज्य है, जहाँ कोई उद्योग और कारखाना नहीं है। उन्होंने कहा, “जो असल बिहार का मुद्दा पूरे चुनाव में था, वो बेरोजगारी का था।”

उन्होंने डबल इंजन की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “20 साल तक नीतीश कुमार जी ने शासन किया। 10-11 साल से नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री हैं। डबल इंजन की सरकार है लेकिन एक शुगर मिल तक चालू नहीं करा पाए।”

तेजस्वी ने दावा किया कि, “सरकार के प्रति लोगों का गुस्सा था। वो नहीं चाहते थे कि एनडीए की सरकार दोबारा बने।” उन्होंने बताया कि 2020 में 10 लाख युवाओं को रोजगार देने की घोषणा के बाद लोगों ने बढ़-चढ़कर RJD को सपोर्ट किया था और उनका वोट प्रतिशत बढ़ा है।

‘चुनाव का कोई मतलब नहीं रह गया’

तेजस्वी यादव ने अपनी हार के पीछे चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “बदलाव सभी चाहते थे। ईवीएम सिर्फ बदलाव नहीं चाहता था, वैलेट बदलाव चाहता था।” उन्होंने चुनाव आयोग पर बेईमानी का आरोप लगाया और कहा कि, “चुनाव आयोग पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती है, ये बिल में एमेंडमेंट भी आया।” उन्होंने निष्कर्ष निकालते हुए कहा, “ये जो हालत बन रहे हैं तो चुनाव का कोई मतलब नहीं रह गया है। सबकुछ फिक्स्ड है।”

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