ISRO का बाहुबली रॉकेट करेगा समंदर में भारत की बादशाहत कायम, CMS-03 उपग्रह से मजबूत होगी नौसेना की ताकत

नई दिल्ली: भारत की अंतरिक्ष शक्ति अब समुद्री सुरक्षा में भी नई छलांग लगाने जा रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) रविवार को अपने अब तक के सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर चुका है। यह उपग्रह न सिर्फ भारतीय नौसेना के संचार नेटवर्क को मजबूत करेगा, बल्कि देश की समुद्री निगरानी क्षमता को भी नई दिशा देगा।

भारत से लॉन्च होने वाला अब तक का सबसे भारी उपग्रह

इसरो के अनुसार, CMS-03 का वजन करीब 4,410 किलोग्राम है, जो भारत से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (GTO) में भेजा जाने वाला अब तक का सबसे भारी उपग्रह होगा। यह 4,000 किलोग्राम से अधिक वज़न वाले श्रेणी का उपग्रह है, जो भारतीय सैन्य और समुद्री संचार प्रणाली को और भी उन्नत बनाएगा।

‘बाहुबली’ रॉकेट LVM3-M5 से होगा लॉन्च

इस मिशन के लिए इसरो अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3-M5 (जिसे ‘बाहुबली रॉकेट’ कहा जाता है) का इस्तेमाल करेगा। यह वही रॉकेट है जिसने 2023 में चंद्रयान-3 को चांद तक पहुंचाकर इतिहास रचा था। 43.5 मीटर ऊंचा यह रॉकेट अपनी भारी भार उठाने की क्षमता के कारण प्रसिद्ध है। इसरो ने बताया कि रॉकेट और उपग्रह का एकीकरण पूरा हो चुका है और इसे लॉन्च से पहले की प्रक्रियाओं के लिए दूसरे लॉन्च पैड पर स्थानांतरित किया गया है।

मिशन को रविवार शाम 5 बजकर 26 मिनट पर लॉन्च किया जाएगा।

GSLV MK-III के नाम से भी जाना जाता है LVM3

वैज्ञानिक दृष्टि से LVM3 को GSLV MK-III कहा जाता है। यह तीन-चरणीय प्रक्षेपण यान है, जिसमें दो ठोस मोटर स्ट्रैप-ऑन (S200), एक द्रव प्रणोदक कोर चरण (L110), और एक क्रायोजेनिक चरण (C25) शामिल है। इस संरचना के कारण इसरो को भारी संचार उपग्रहों को GTO कक्षा में स्थापित करने की तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त हुई है।

GSAT-11 के बाद CMS-03 बनेगा नया रिकॉर्डधारी

इससे पहले इसरो ने दिसंबर 2018 में अपना सबसे भारी संचार उपग्रह GSAT-11 (5,854 किग्रा) लॉन्च किया था, लेकिन उसे फ्रेंच गुयाना से यूरोपीय एरियन-5 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया था। वहीं, CMS-03 भारत की धरती से लॉन्च होने वाला अब तक का सबसे भारी उपग्रह होगा, जो देश की अंतरिक्ष तकनीक में आत्मनिर्भरता का बड़ा उदाहरण है।

समुद्री और सैन्य संचार को देगा नई ताकत

CMS-03 एक मल्टी-बैंड कम्युनिकेशन सैटेलाइट है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय भूभाग और विस्तृत समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षित और विश्वसनीय संचार सुनिश्चित करना है। यह उपग्रह भारतीय नौसेना के अभियानों और समुद्री निगरानी क्षमताओं को और भी सशक्त बनाएगा।

रुक्मिणी (GSAT-7) की जगह लेगा CMS-03

नया उपग्रह GSAT-7 (रुक्मिणी) की जगह लेगा, जो 2013 से भारतीय नौसेना की रीढ़ रहा है। रुक्मिणी उपग्रह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान नौसेना को नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशंस के ज़रिए पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियों पर नियंत्रण बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई थी। अब CMS-03 उसके आधुनिक संस्करण के रूप में समुद्री सीमाओं की रक्षा को और भी मजबूत करेगा।

चंद्रयान-3 वाला रॉकेट फिर रचेगा इतिहास

LVM3 वही ‘बाहुबली रॉकेट’ है, जिसने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग करने वाला पहला देश बनाया था। इसकी शक्तिशाली क्रायोजेनिक इंजन तकनीक इसे लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 8,000 किलोग्राम और GTO में लगभग 4,000 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने की क्षमता देती है।

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