सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उड़ान भरता Vodafone Idea, निवेशकों को मिली बड़ी राहत, शेयर बना रॉकेट

Vodafone Idea के निवेशकों के लिए आज का दिन बड़ी राहत लेकर आया। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद कंपनी के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखा गया। शुरुआती कारोबार में 2% की गिरावट के साथ खुला शेयर अचानक पलटा और करीब 9% तक की तेजी के साथ उछल गया। NSE पर यह शेयर 11.4% बढ़कर 10.52 रुपये, यानी अपने 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

क्या कहा कोर्ट ने?

दरअसल, टेलीकॉम कंपनी Vodafone Idea ने अपने AGR (Adjusted Gross Revenue) बकाए से जुड़ी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी। कंपनी ने दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा लगाए गए 5,606 करोड़ रुपये के अतिरिक्त AGR डिमांड को चुनौती दी थी।

कंपनी का कहना था कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में AGR देनदारियां पहले ही तय हो चुकी थीं, इसलिए नई मांग उचित नहीं है। कोर्ट ने मामले को सरकार की नीति के दायरे में बताते हुए कहा कि सरकार कंपनी की याचिका पर पुनर्विचार कर सकती है।

यह फैसला कर्ज में डूबी Vodafone Idea के लिए किसी उम्मीद की नई किरण से कम नहीं है, जिससे कंपनी को अपने ऑपरेशंस बनाए रखने और नए निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

क्या है AGR विवाद?

AGR (Adjusted Gross Revenue) टेलीकॉम कंपनियों की कमाई का वह हिस्सा है, जिस पर वे सरकार को लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम चार्ज अदा करती हैं।
पहले AGR की गणना सिर्फ नेटवर्क सर्विस से होने वाली आमदनी पर होती थी, लेकिन 2019 में इसमें बैंक ब्याज, संपत्ति की बिक्री जैसी गैर-टेलीकॉम आय को भी शामिल कर लिया गया।

इससे कंपनियों पर भारी बकाया जुड़ गया और सरकार व टेलीकॉम कंपनियों के बीच कानूनी जंग छिड़ गई। 2021 में सरकार ने नियमों में ढील दी और गैर-टेलीकॉम आय को AGR के दायरे से बाहर रखा, जिससे कुछ राहत मिली।

कितना है कंपनियों पर बकाया AGR?

2020 में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को 93,520 करोड़ रुपये का AGR बकाया चुकाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने 10 साल की अवधि देते हुए कहा था कि कंपनियां 10% रकम 31 मार्च 2021 तक और बाकी रकम 31 मार्च 2031 तक चुका सकती हैं।

Vodafone Idea ने 2016-17 के AGR कैलकुलेशन को गलत बताते हुए दोबारा समीक्षा की मांग की थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है।

निवेशकों में लौटी उम्मीद

कोर्ट के इस फैसले के बाद Vodafone Idea के शेयरों में आई तेजी ने निवेशकों को नया भरोसा दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर सरकार पुनर्विचार में राहत देती है, तो कंपनी को वित्तीय पुनर्गठन और निवेश आकर्षित करने का बेहतर मौका मिलेगा।

(डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल शैक्षणिक और सूचनात्मक उद्देश्य से दी गई है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश का निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।)

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