लखनऊ/दिल्ली: 11 अगस्त 2025 का दिन समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए खासा फायदेमंद साबित हुआ। यूपी से लेकर दिल्ली तक सपा ने सियासी मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
लखनऊ में विधानसभा में हंगामा
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज से विधानमंडल के मानसून सत्र की शुरुआत हुई। कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने हाल ही में गोरखपुर में उनके साथ हुई कथित अभद्रता का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां उनके वाहन को रोका गया और उन्हें खींचने की कोशिश हुई। इस पर सपा विधायकों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी और मामले की जांच की मांग की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “माता प्रसाद पांडेय वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन कुछ लोग आपको मोहरा बनाकर आपके कंधे पर बंदूक रखकर निशाना साध रहे हैं।” सीएम ने गोरखपुर विरासत कॉरिडोर को लेकर सपा की राजनीति को विकास-विरोधी करार दिया।
संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने भी कहा कि यह पूरी तरह से राजनीतिक मुद्दा है, जिसकी जांच की आवश्यकता नहीं है। लगातार हंगामे के बीच स्पीकर सतीश महाना ने पहले 15 मिनट के लिए और फिर दिनभर के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
दिल्ली में बैरिकेडिंग फांद चर्चा में आए अखिलेश
इसी बीच दिल्ली में विपक्षी दल ‘इंडिया ब्लॉक’ के नेताओं को पुलिस ने रोकने की कोशिश की। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और 2024 लोकसभा चुनाव में कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ विरोध मार्च के दौरान, अखिलेश यादव पुलिस बैरिकेड के ऊपर से कूद गए। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और अखिलेश चर्चा के केंद्र बन गए।
सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वीडियो को बड़े पैमाने पर शेयर करते हुए लिखा – “PDA ने ठाना है, SIR वापस करवाना है।” वहीं पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर भी यही संदेश पोस्ट किया गया।
बीजेपी के लिए बढ़ी मुश्किलें, विपक्ष में भी हलचल
लखनऊ के हंगामे और दिल्ली के प्रदर्शन ने भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है। सपा लगातार मानसून सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग कर रही है। दूसरी ओर, यह सवाल भी उठ रहा है कि जब प्रदर्शन पूरे विपक्ष का था, तब सुर्खियां सिर्फ अखिलेश यादव ही क्यों बटोर ले गए।