प्रधानमंत्री मोदी ने एनसीसी रैली को किया संबोधित, युवाओं को ‘फोर्स फॉर ग्लोबल गुड’ के रूप में प्रेरित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली के करियप्पा परेड ग्राउंड में आयोजित राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) रैली में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कैडेट्स को संबोधित करते हुए एनसीसी दिवस के अवसर पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आज हमारे बीच 18 मित्र देशों से आए करीब 150 कैडेट्स मौजूद हैं, मैं इन सभी का भी स्वागत करता हूं।पीएम मोदी ने कहा कि रिपब्लिक डे परेड में चयनित होना अपने आप में एक अचीवमेंट है। इस बार की परेड इसलिए भी खास थी, क्योंकि हमारे गणतंत्र ने 75 साल पूरे किए, ये यादें जीवन भर आपके साथ रहने वाली हैं। भविष्य में आप याद करेंगे कि जब गणतंत्र के 75 साल पूरे हुए थे, तब हमने परेड में हिस्सा लिया था। युवा हृदय में एनसीसी राष्ट्र भक्ति की अलख जगाता है। गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेना युवाओं के लिए गर्व का क्षण है, जो हमें अपने इतिहास से जोड़ता है।
उन्होंने कहा कि 75 वर्षों के गणतंत्र में भारत के संविधान ने हर समय देश को लोकतांत्रिक प्रेरणा दी, नागरिक कर्तव्यों का महत्व समझाया। इसी तरह एनसीसी ने भी हर समय भारत के नौजवानों को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा दी और उन्हें अनुशासन का महत्व समझाया। आप 21वीं सदी में भारत के विकास को, दुनिया के विकास को निर्धारित करने वाले हैं।उन्होंने आगे कहा कि भारत के युवा सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि फोर्स फॉर ग्लोबल गुड हैं। आज दुनिया इस बात को मान रही है। कोई भी व्यक्ति हो या देश, उसका सामर्थ्य तब बढ़ता है, जब वह अनावश्यक बाधाओं से पार पा लेता है। मुझे संतोष है कि भारत में युवाओं के सामने रहीं अनेक बाधाओं को बीते 10 वर्षों में हमने हटाने का काम किया है। इससे युवाओं का सामर्थ्य बढ़ा है, देश का सामर्थ्य बढ़ा है।’वन नेशन वन इलेक्शन’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर डिबेट चल रही है, लोग अपने-अपने विचार रख रहे हैं। भारत के युवाओं से मैं आग्रह करता हूं कि आप जहां भी हों, इस डिबेट को आगे बढ़ाएं और बड़ी संख्या में इस डिबेट में हिस्सा लें क्योंकि ये आपके भविष्य से जुड़ा विषय है। आजादी के बाद काफी समय तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होते थे, लेकिन फिर ये पैटर्न टूट गया। इसका देश को बहुत नुकसान उठाना पड़ा। हर चुनाव में वोटिंग लिस्ट अपडेट होती है, बहुत सारे काम होते हैं और इसमें अक्सर हमारे टीचर्स की ड्यूटी लगती है। जिस कारण से पढ़ाई प्रभावित होती है। बार-बार होने वाले चुनावों की वजह से गवर्नेंस में भी मुश्किलें आती हैं।

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