जम्मू-कश्मीर: 2024 में सेना ने तोड़ी आतंकियों की कमर, 69 आतंकवादियों को उतारा मौत के घाट

साल 2024 मेंजम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने आतंकवाद विरोधी अभियानों में बड़ी सफलता हासिल की. इस साल सेना के जवानों ने कई आतंकवादियों को ढेर किया. अलग-अलग अभियानों में लगभग 69 आतंकियों को मार गिराया है, जिसमें 24 स्थानीय आतंकी, 27 विदेशी आतंकी समेत 18 घुसपैठी शामिल हैं. ये ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर के कोने-कोने तक फैले हुए थे.मारे गए 24 स्थानीय आतंकवादियों में से कुछ की पहचान शोपियां के चेक चोलन के बिलाल रसूल भट, श्रीनगर के इलाहाईबाग के दानिश एजाज शेख और अज्ञात स्थान के सैफुल्लाह के रूप में की गई. वहीं अन्य आतंकवादियों की पहचान लश्कर कमांडर बासित डार और उमर खान, रियाज अहमद डार और रईस अहमद, सभी काकापोरा पुलवामा से, यावर बशीर रेडवानी बाला, , दासेंड यारीपोरा के जाहिद अहमद डार,औदुरस कुलगाम के तौहीद अहमद राथर और बटपोरा खुरी कुलगाम के शकील अहमद वानी शामिल हैं.
सेना ने मार गिराए आतंकी
वहीं मारे गए स्थानीय आतंकियों की सूची में शोपियां के कुटीपोर का आदिल हुसैन वानी, शोपियां के कानीपोरा का फैसल बशीर लोन, चाडूरा बडगाम का अकीब अहमद शेरगोजरी और कुलगाम के चावलगाम का उमैस वानी भी शामिल हैं. अन्य स्थानीय आतंकवादी, जैसे क़ाइमोह कुलगाम से लेट कमांडर जुनैद भट, फारूक अहमद भट, मुहम्मदपुर से मुश्ताक अहमद इटू, और खांडीपोरा से आदिल हुसैन भी इस साल मुठभेड़ों में मारे गए. इसके अलावा कुलगाम से यासिर जाविद और हावूरा,कुलगाम से मोहम्मद इरफान भी सेना के अभियान में मारे गए.
अलग-अलग जगहों पर हुईं मुठभेड़
बताया जा रहा है कि विभिन्न मुठभेड़ों में स्थानीय आतंकियों के अलावा 27 विदेशी उग्रवादी भी मारे गये. ये ऑपरेशन अक्सर दुर्गम इलाकों में किए गए थे. इसके अलावा, सेना ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर हुई मुठभेड़ों में 18 घुसपैठियों को सफलतापूर्वक मार गिराया. ये घटनाएं मुख्य रूप से उरी सेक्टर के सबुरा नाला क्षेत्र, केरन सेक्टर, कोवाट लोलाब, कुपवाड़ा के कामकारी सेक्टर और राजौरी के नौशेरा सेक्टर में हुईं.
आतंकियों के सफाए के लिए अभियान
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का सफाया करने के लिए सुरक्षाबलों द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है. सुरक्षा बल सीमा पार से आतंकवाद को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क हैं. सीमा पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. हालांकि इस साल आतंकियों ने कई लोगों की जान ले ली जिसमें लोकल लोगों के अलावा दूसरे राज्य के मजदूर भी शामिल हैं. इसके साथ ही कई जवान भी शहीद हुए हैं.

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