दिल्ली के महरौली पार्क को लेकर दाखिल करेंगे सर्वे रिपोर्ट… ASI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण (ASI) ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वो दिल्ली के महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क के अंदर धार्मिक संरचनाओं की सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर एक सप्ताह के भीतर अपनी सर्वे रिपोर्ट दाखिल करेगा. सीजेआई संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने 13वीं शताब्दी की आशिक अल्लाह दरगाह और बाबा फरीद की चिल्लागाह सहित दिल्ली के महरौली पुरातत्व पार्क के अंदर सदियों पुरानी धार्मिक संरचनाओं की सुरक्षा के लिए निर्देश पारित करने से इनकार कर दिया था.लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जुलाई में पीठ ने इस मामले में एएसआई को पक्षकार बनाया था और स्थिति रिपोर्ट मांगी थी. पीठ ने राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण से भी रिपोर्ट मांगी थी. शुक्रवार को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज एएसआई की ओर से पेश हुए. उन्होंने अदालत को बताया कि रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे एक सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाएगा.
अदालत अब फरवरी में करेगी सुनवाई
इसके बाद सीजेआई ने कहा कि एएसआई के लिए एएसजी नटराज का कहना है कि एएसआई रिपोर्ट तैयार है और 1 सप्ताह के भीतर दाखिल की जाएगी. 24 फरवरी, 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में इसे फिर से सूचीबद्ध करें. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे पहले अदालत की ओर से गठित धार्मिक समिति को अपना प्रतिनिधित्व दें. धार्मिक समिति की ओर से लिए गए निर्णय को लागू करने से पहले रिकॉर्ड पर रखा जाना था.
याचिका में ध्वस्त करने को लेकर व्यक्त की गई थी आशंका
हाई कोर्ट में दायर याचिका में यह आशंका जताई गई थी कि महरौली में दरगाह और चिल्लागाह को दिल्ली विकास प्राधिकरण की ओर से जल्द ही ध्वस्त कर दिया जाएगा. याचिका में 600 साल पुरानी अखोनजी मस्जिद के ध्वस्तीकरण का हवाला दिया गया था. सरकारी प्राधिकरण की ओर से अदालत को बताया गया कि किसी भी संरक्षित स्मारक या राष्ट्रीय स्मारक को ध्वस्त नहीं किया जाएगा. इसके बाद हाई कोर्ट ने इस मामले का निपटारा कर दिया था.
हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
आपने आदेश में जस्टिस मनमोहन की अगुवाई वाली खंडपीठ ने अनाधिकृत अतिक्रमण और विरासत के अधिकार को संतुलित करने की जरूरतों के बारे में टिप्पणियां की थीं. हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए जमीर अहमद जुमलाना नाम के एक व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था जिस पर अब सुनवाई चल रही है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *