
पिछले लोकसभा चुनाव में शुरुआती दौर में सभी समीकरण भाजपा गठबंधन के पक्ष में दिखाई दे रहे थे। भाजपा शुरुआत से ही मिशन 80 के असंभव से लक्ष्य को हासिल करने की रणनीति बनाकर चल रही थी। विपक्ष की कमजोर चुनावी तैयारी को देखकर थोड़े बहुत ना नुकुर के साथ लोग यह मानकर चल रहे थे कि भाजपा 80 सीटें भले न जीत सके, लेकिन वह 2014 की सीटों की संख्या के आसपास रह सकती है। लेकिन चुनाव के ठीक पहले राहुल गांधी और अखिलेश यादव की जुगलबंदी और जातीय समीकरणों के बीच संविधान के मुद्दे ने भाजपा के सारे अनुमानों को जमींदोज कर दिया।
सपा-कांग्रेस मजबूत कर रही अपना चुनावी पिच
मंगेश यादव एनकाउंटर मामले के सहारे अखिलेश यादव उसी पिच को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय भी मंगेश यादव के परिवार से मिलने जा रहे हैं। वे भी इसी पिच पर यूपी सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। यानी विपक्ष अपनी उसी रणनीति को मजबूत करना चाहता है जिसके सहारे उसे 2024 के लोकसभा चुनाव में संजीवनी मिली थी।
भाजपा भी पीछे नहीं, खुद मुख्यमंत्री ने संभाला मोर्चा
लेकिन जातिवाद के पिच पर खेलने का आरोप केवल विपक्ष पर ही नहीं लगाया जा सकता। जब लखनऊ में एक भाई और बहन के साथ कुछ उपद्रवियों के साथ अभद्रता की गई थी, तब स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में लखनऊ विधानसभा में चर्चा करते हुए एक यादव और एक मुसलमान अपराधी का नाम लिया था। जबकि इस घटना में भी कई वर्गों के लड़के शामिल थे। यानी इस घटना का जिक्र कर भी मुख्यमंत्री एक वर्ग विशेष को ही निशाना बना रहे थे जिनके बारे में माना जाता है कि वे गैर भाजपाई दलों के समर्थक होते हैं। यानी प्रदेश में जातिवाद के मुद्दे को हवा देने का आरोप केवल विपक्ष पर ही नहीं लगाया जा सकता। सत्ता पक्ष भी इस मुद्दे को अपनी सुविधा के अनुसार खुलकर खेल रहा है।
लेकिन यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि जिन समीकरणों के सहारे विपक्ष ने बीजेपी के केंद्रीय मुद्दों (राम मंदिर, राष्ट्रवाद) को बेअसर कर दिया था, क्या उसी के सहारे वह योगी आदित्यनाथ सरकार के कानून-व्यवस्था की मजबूती के कवच को भी भेद सकेगी, यह देखने वाली बात होगी।
पुराना आइडिया इस्तेमाल कर रही भाजपा
लेकिन इस मुद्दे को पूरी तरह कानून-व्यवस्था का मुद्दा बताते हुए भाजपा भी इसे भुनाने से पीछे नहीं हट रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2022 का विधानसभा चुनाव कानून व्यवस्था के मुद्दे पर ही जीता था। भाजपा ने सत्ता में होने के बाद भी 2012 के अखिलेश यादव सरकार के दौरान हुई अपराध की घटनाओं के सहारे विपक्ष को घेरने की कोशिश की थी और उसे इसमें सफलता भी मिली थी। मंगेश यादव एनकाउंटर केस के सहारे भी वे इसी पिच पर अखिलेश यादव को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष का इस तरह कर रही मुकाबला
ध्यान देने की बात है कि इस मामले में भाजपा ने ओमप्रकाश राजभर जैसे नेताओं को सबसे पहले सामने उतारा। राजभर ने अखिलेश यादव सरकार में एक जाति विशेष के लोगों के द्वारा गुंडई करने का आरोप लगाते हुए एनकाउंटर को सही ठहराया। जब योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर विपक्ष को घेरा तब भी उनके साथ संजय निषाद खड़े थे। यानी भाजपा कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर विपक्ष को घेरते हुए भी जातिगत राजनीति को आंखों से ओझल नहीं होने दे रही है। यह बताता है कि भाजपा की निगाह विपक्ष की रणनीति पर मजबूती से टिकी हुई है।
टूट चुका योगी का तिलस्म- कांग्रेस
यूपी कांग्रेस उपाध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने अमर उजाला से कहा कि भाजपा ने शुरुआती दौर में कानून-व्यवस्था के नाम पर हो रहे एनकाउंटर को सही ठहरा लिया था, लेकिन जिस तरह एक के बाद एक एनकाउंटर पर सवाल खड़े हुए हैं, उससे यह तिलस्म टूट गया है। अब पूरा प्रदेश यह जान चुका है कि इन एनकाउंटर के पीछे प्रदेश सरकार की नाकामी को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब ऐसे किसी भी प्रयास से बेरोजगारी और गरीबी जैसे अहम मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
एनकाउंटर पर सत्ता पक्ष को देना होगा जवाब- सपा
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मो. आजम खान ने अमर उजाला से कहा कि मंगेश यादव एनकाउंटर को हम हत्याकांड कह रहे हैं। इसके पीछे राजनीति नहीं, बल्कि ठोस कारण हैं जिसके जवाब सत्ता पक्ष को देने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले का सच केवल तभी सामने आ सकता है जब इस मामले की जांच हाईकोर्ट या सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान जज की निगरानी में कराया जाए।
सपा नेता ने कहा कि सत्ता पक्ष ने एनकाउंटर को अपनी हर नाकामी को छुपाने का हथियार बना लिया है, लेकिन उन्हें समझना पड़ेगा कि लोकतंत्र केवल एनकाउंटर से नहीं चलता। उन्हें उन सभी सवालों का जवाब देना पड़ेगा जो आज इस एनकाउंटर के बाद उठे हैं।
अपराधी की जाति देखी, सिपाही की क्यों नहीं- भाजपा
उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने अमर उजाला से कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब अपराधियों को जाति के नाम पर महिमामंडन किया जा रहा है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव एक अपराधी का जाति के नाम पर बचाव कर रहे हैं, यह समाज के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने कहा कि इससे भी ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि अब तक सपा-बसपा और राष्ट्रीय जनता दल जैसी क्षेत्रीय पार्टियां ही इस तरह की राजनीति करती थीं, लेकिन अब कांग्रेस भी उनके साथ आकर खड़ी हो गई है। यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
राकेश त्रिपाठी ने कहा कि यूपी की भाजपा सरकार के खिलाफ विपक्ष के द्वारा जानबूझकर एक नकारात्मक नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यूपी सहित पूरा देश जानता है कि योगी आदित्यनाथ सरकार अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए जानी जाती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था खराब करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।