रियाणा की सत्ता संभालने वाले Nayab Saini फिर बने पार्टी आलाकमान की पहली पसंद

मनोहर लाल खट्टर के बाद हरियाणा के सर्वे सर्वा बने नायब सिंह सैनी पर बीजेपी आलाकमना ने एक बार फिर भरोसा जताते हुए उन्हें अपना मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया है। सैनी ओबीसी समुदाय से आते हैं और पिछले साल उन्हें बीजेपी हरियाणा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था।नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का विश्वासपात्र माना जाता है। सैनी को संगठन में काम करने का लंबा अनुभव है। 1996 में उन्हें हरियाणा बीजेपी के संगठन में जिम्मेदारी दी गई। उसके बाद वर्ष 2002 में नायब सैनी अंबाला बीजेपी युवा मोर्चा के जिला महामंत्री बने थे। वर्ष 2005 में नायब सिंह सैनी भाजपा अंबाला युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष बने। इसके बाद नायब सिंह सैनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

उन्हें बीजेपी हरियाणा किसान मोर्चा का प्रदेश महामंत्री भी बनाया गया। सैनी का जन्म अम्बाला के मीज़ापुर माजरा गांव में 25 जनवरी, सन् 1970 में हुआ था। नायब सिंह ने मेरठ की चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से कानून यानि LLB की पढ़ाई की। उन्होंने बिहार के मुज़फ्फरपुर के बी.आर.अम्बेडकर बिहार यूनिवर्सिटी से भी पढ़ाई की है। उन्होंने सन् 1996 में सियासत में अपना पहला कदम रखा था। उन्होंने राजनीतिक करियर की शुरुआत BJP संगठन में एंट्री के साथ की थी और 2000 तक यहां कामकाज किया। इस दौरान वह संगठन में अलग-अलग पदों पर रहे। फिर 2002 में नायब सिंह अंबाला में युवा विंग के जिला महासचिव रहे।

इसके बाद 2005 में वह अंबाला में जिला अध्यक्ष बनाए गए। काम के प्रति लगन-भाव को देखते हुए 2009 में उन्हें हरियाणा में बीजेपी किसान मोर्चा के राज्य महासचिव बनाया गया। 2012 में एक और प्रमोशन मिलने के बाद नायब सिंह को अंबाला बीजेपी जिला अध्यक्ष बनाया गया। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग पदों पर सेवाएं दीं। नायब सिंह के राजनीतिक सफर तब चमक उठा जब वह 2014 में पहली बार अंबाला की नारायणगढ़ विधानसभा से विधायक बने। फिर 2016 में उनको हरियाणा सरकार में श्रम-रोजगार मंत्री बनाया गया। इसके अलावा वह खान और भूविज्ञान मंत्री और नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री भी रहे हैं। नायब सिंह सैनी को पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का करीबी माना जाता है। वहीं बीजेपी संगठन में भी उनकी पकड़ काफी अच्छी मानी जाती है। बताया जाता है 2019 में जब सैनी सांसद बने तो BJP ने ना सिर्फ 10 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की, बल्कि पार्टी उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से प्रत्याशियों को हराया था।

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