
यूपी में घूमने के लिहाज से ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों स्थल हैं। यहां देश-विदेश से लोग घूमने आते हैं। उन्हीं में से एक है मथुरा। भगवान कृष्ण की यह नगरी के धार्मिक स्थल हिंदू धर्म के लिए बेहद खास है।
यहां दूर-दूर से लोग घूमने आते हैं। दिल्ली से करीब 200 किलोमीटर दूर ये शहर पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। यहां के घाट और पुराने मंदिर आपको मंग्नमुग्ध कर देगा। मथुरा की खास बात ये भी है कि यहां कम पैसों में आपको बहुत कुछ घूमने को मिलता है।
श्री कृष्ण जन्मभूमि
मथुरा के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक श्री कृष्ण जन्मभूमि है। यहां जेल की कोठरी भी है। ऐसा कहा जाता है कि देवकी और वासुदेव को कंस ने इस जेल में बंद किया और यहीं पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इतिहासकारों के मुताबिक इस मंदिर पर भगवान श्रीकृष्ण की चार मीटर की सोने की प्रतिमा थी। जिसे महमूद गजनवी ने चुरा लिया था।
बांके बिहारी मंदिर
बांके बिहारी मंदिर मथुरा के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान कृष्ण के दर्शन करने आते हैं। यह मंदिर वृंदावन धाम में रमण रेती के पास स्थित है। इस मंदिर का निर्माण 1864 में स्वामी हरिदास ने करवाया था। इस मंदिर की वास्तुकला राजस्थानी शैली है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा जमीन से प्रकट हुई थी।
द्वारकाधीश मंदिर
मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर को ग्वालियर के खंजाची सेठ गोकुल दास पारीख ने साल 1814 में बनवाया था। ये मंदिर विश्रामघाट के पास है। यहां भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा द्वारका के राजा के रूप में है। जन्माष्टमी के समय इस मंदिर में दूर-दूर से भक्त भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करने आते हैं।
इस्कॉन मंदिर
जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा स्थित इस्कॉन मंदिर श्रद्धालुओं से भर जाता है। यहां देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग घूमने आते हैं। यहां राधा-कृष्ण के अलावा अन्य देवी देवताओं की भी प्रतिमा देखने को मिलती है। इस मंदिर की नींव इस्कॉन के संस्थापक स्वामी प्रभुपाद ने रखी थी।
प्रेम मंदिर
मथुरा का प्रेम मंदिर श्रद्धालुओं को अपनी तरफ आकर्षित करता है। शाम के समय मंदिर में जलती लाइटें इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देती हैं। 53 एकड़ में फैला ये मंदिर राधा-कृष्ण और सीता-राम को समर्पित है। इस मंदिर की नींव कृपालु महराज द्वारा रखी गई है। करीब 150 करोड़ की लागत से बने इस मंदिर का निर्माण कार्य 2001 में शुरू हुआ था जो 2012 में जाकर संपन्न हुआ।
विश्राम घाट
मथुरा के 25 घाटों में से एक विश्राम घाट है। ये घाट खूबसूरत रंगों से सजा है। ऐसा कहा जाता है कि कंस का वध करने के बाद कृष्ण ने इसी घाट पर आराम किया था। खास बात ये है कि इस घाट के उत्तर और दक्षिण में 12-12 घाट हैं। इसके अलावा ये स्थल कई ऋषि-मुनियों की तपोस्थली भी रही है।
राधा कुंड
मथुरा से करीब 28 किलोमीटर दूर राधा कुंड है। ये गोवर्धन के परिक्रमा का मुख्य पड़ाव है। श्रद्धालुओं के मुताबिक राधा ने अपने कंगन से कुंड खोदकर स्नान किया था और ठीक इसी के पास में कृष्ण ने बांसुरी से कुंड खोदकर स्नान किया था। राधा के खोदे हुए कुंड को राधाकुंड कहा गया।